श्री राम जन्मभूमि मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने शुक्रवार को राम मंदिर और श्री राम जन्मभूमि परिसर का विस्तृत निरीक्षण कराया। इस दौरान उन्होंने स्थानीय मीडिया को पूरे परिसर का भ्रमण कराते हुए अब तक हुए निर्माण कार्यों और आगामी योजनाओं की जानकारी दी। निरीक्षण के दौरान उन्होंने बताया कि राम मंदिर परिसर में बनाए गए सप्त मंदिर केवल धार्मिक आस्था के केंद्र नहीं हैं, बल्कि यह सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक एकता का भी सशक्त प्रतीक बनकर उभर रहे हैं। उन्होंने कहा कि निषाद राज गुहा, देवी अहिल्या और माता शबरी जैसे मंदिरों के निर्माण के पीछे उद्देश्य समाज के उन वर्गों को सम्मान देना है, जिनका राम कथा में विशेष योगदान रहा है। चार मंदिरों पर ध्वजारोहण, तीन पर जल्द होगा आयोजन नृपेंद्र मिश्रा ने जानकारी दी कि सप्त मंदिरों में से चार मंदिरों पर ध्वजारोहण की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, जबकि शेष तीन मंदिरों पर जल्द ही ध्वजारोहण कराया जाएगा। उन्होंने बताया कि शिव मंदिर पर ध्वजारोहण के लिए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को आमंत्रित किया गया है। 19 निर्माण कार्य ट्रस्ट को होंगे हस्तांतरित उन्होंने कहा कि राम जन्मभूमि परिसर के भीतर अब तक कुल 19 प्रमुख निर्माण कार्य पूरे किए जा चुके हैं, जिन्हें शीघ्र ही श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को सौंप दिया जाएगा। इन परियोजनाओं पर अब तक करीब 1800 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि परिसर के विकास कार्यों को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जा रहा है, ताकि श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिल सकें। निर्णयों में राजनीति की भूमिका पर दिया बयान पत्रकार वार्ता के दौरान एक सवाल के जवाब में नृपेंद्र मिश्रा ने कहा कि किसी भी बड़े निर्णय में लगभग 20 प्रतिशत फैसले प्रशासनिक होते हैं, जबकि 80 प्रतिशत निर्णय राजनीतिक होते हैं। उन्होंने बाबरी मस्जिद विध्वंस का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय कार्रवाई के लिए तैयार फाइल को तत्कालीन मुख्यमंत्री कल्याण सिंह ने वापस कर दिया था और कार सेवकों पर गोली न चलाने का निर्णय लिया था। यह बयान उस सवाल के संदर्भ में आया, जिसमें मुलायम सिंह यादव के कार्यकाल के दौरान कर सेवकों पर गोली चलाने के आदेश को लेकर उनसे प्रतिक्रिया मांगी गई थी। परिसर को वैश्विक आस्था केंद्र बनाने की तैयारी नृपेंद्र मिश्रा ने कहा कि राम मंदिर परिसर को केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि एक वैश्विक आस्था केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। यहां आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं, सुव्यवस्थित दर्शन व्यवस्था और सांस्कृतिक अनुभव प्रदान करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने भरोसा जताया कि आने वाले समय में अयोध्या न केवल देश, बल्कि दुनिया के प्रमुख धार्मिक पर्यटन स्थलों में अपनी अलग पहचान बनाएगा।
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