अररिया में भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए फारबिसगंज अंचल कार्यालय के डेटा एंट्री ऑपरेटर योगेश कुमार चौधरी को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। उन्हें रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ा गया था, जिसके बाद जिला पदाधिकारी के निर्देशों पर यह कार्रवाई की गई। यह कार्रवाई विशेष निगरानी इकाई, बिहार की जांच और विभागीय जांच के आधार पर की गई है। अंचल अधिकारी फारबिसगंज द्वारा जारी आदेश के अनुसार, विशेष निगरानी इकाई की टीम ने 31 अक्टूबर 2025 को योगेश कुमार चौधरी को 10,000 रुपए की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया था। इस मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (संशोधित 2018) तथा बीएनएस 2023 की धारा 61(2)(a) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी। गिरफ्तारी के बाद आरोपी को चिकित्सीय आधार पर जमानत मिल गई थी। जमानत के बाद दोबारा किया था ज्वाइन जमानत मिलने के बाद 26 दिसंबर 2025 को योगेश कुमार चौधरी ने फारबिसगंज अंचल कार्यालय में दोबारा योगदान दे दिया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए उनसे स्पष्टीकरण मांगा गया। भूमि सुधार उप समाहर्ता के माध्यम से प्राप्त स्पष्टीकरण में उन्होंने आरोपों से इनकार किया। हालांकि, विशेष निगरानी इकाई द्वारा रंगे हाथ गिरफ्तारी को मुख्य साक्ष्य मान लिया गया। विभागीय जांच में पाया गया कि उनका आचरण न केवल भ्रष्टाचार से जुड़ा था, बल्कि सरकारी सेवा के अनुशासन और मानकों के पूरी तरह प्रतिकूल था। वरीय अधिकारियों ने कठोर कार्रवाई की अनुशंसा की थी। इन तथ्यों के आधार पर जिला प्रशासन ने योगेश कुमार चौधरी को 31 अक्टूबर 2025 से प्रभावी रूप से डेटा एंट्री ऑपरेटर पद से सेवा मुक्त कर दिया है। जनता से रिश्वत नहीं की जाएगी बर्दाश्त जिला पदाधिकारी ने स्पष्ट संदेश दिया कि भ्रष्टाचार के प्रति शून्य सहनशीलता की नीति अपनाई गई है। उन्होंने कहा कि दोषी पाए जाने वाले किसी भी कर्मी के खिलाफ इसी तरह सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। सरकारी कार्यालयों में जनता से किसी भी प्रकार की रिश्वत या अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। स्वच्छ प्रशासन सुनिश्चित करने के लिए लगातार निगरानी रखी जा रही है। यह कार्रवाई अररिया जिले में भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
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