अशोकनगर जिले में किसानों को अब उर्वरक के लिए लंबी कतारों में नहीं लगना पड़ेगा। 1 अप्रैल से जिले में ई-विकास (वितरण एवं कृषि उर्वरक आपूर्ति समाधान) प्रणाली लागू की जा रही है। इसके तहत जायद और खरीफ सीजन के लिए उर्वरक का वितरण पूरी तरह ऑनलाइन प्रक्रिया से होगा। इस नई व्यवस्था के तहत किसानों को पहले ऑनलाइन पंजीयन कराना अनिवार्य होगा, जिसके बाद ही उन्हें उर्वरक मिल पाएगा। किसान अपनी सहकारी समिति, डबल लॉक केंद्र, एम.पी. एग्रो और निजी विक्रेताओं के पास निशुल्क पंजीकरण करा सकते हैं। इसके अतिरिक्त, एम.पी. ऑनलाइन और कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) के कियोस्क पर निर्धारित शुल्क देकर भी पंजीयन कराया जा सकेगा। उर्वरक खरीदने के लिए किसानों को आधार नंबर के माध्यम से ऑनलाइन ई-टोकन बनाना होगा। पंजीयन के दौरान, फार्मर आईडी में किसान की जमीन (रकबा) एग्री स्टेक के जरिए स्वतः प्रदर्शित होगी। इसके बाद, किसान को अपने खसरा नंबर के अनुसार बोई जाने वाली फसल का चयन करना होगा। मोबाइल पर मैसेज और ई-टोकन मिलेगा
फसल के चयन के आधार पर, सिस्टम स्वतः ही उर्वरक की आवश्यक मात्रा दर्शाएगा। यह प्रक्रिया पूरी होने पर, किसान के मोबाइल पर एक मैसेज और ई-टोकन प्राप्त होगा। इस ई-टोकन के माध्यम से किसान अपने चुने गए विक्रय केंद्र से उर्वरक खरीद सकेंगे। प्रशासन ने यह भी सुनिश्चित किया कि कोई भी किसान इस नई व्यवस्था से वंचित न रहे। सिकमी किसान, मृतक किसान के आश्रित, शारीरिक रूप से असक्षम एवं वृद्ध किसान, संयुक्त खाताधारक (जिनकी भूमि एग्री स्टेक पर प्रदर्शित नहीं हो रही है), वनपट्टाधारी और शासकीय पट्टाधारी किसानों के लिए भी पोर्टल पर विशेष प्रावधान किए गए हैं। इस नई डिजिटल व्यवस्था से पारदर्शिता बढ़ने के साथ-साथ किसानों को समय पर उर्वरक उपलब्ध हो सकेगा।
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