बाराबंकी के सूरतगंज स्थित आजीविका महिला क्लस्टर (CLF) में 16 लाख रुपये के गबन का मामला सामने आया है। इस घोटाले में वित्तीय हेराफेरी के साथ-साथ चेकबुक चोरी और फर्जी हस्ताक्षरों के जरिए सरकारी धन निकालने का आरोप है। क्लस्टर की अध्यक्ष सुनीला कुमारी ने इस पूरी साजिश का पर्दाफाश किया है। उनकी शिकायत के बाद पुलिस ने पूर्व बैंक मैनेजर और क्लस्टर मैनेजर सहित 10 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अध्यक्ष सुनीला कुमारी के खुलासे के अनुसार, यह पूरा मामला अगस्त महीने में सामने आया था। आरोप है कि रेखा पाल, क्लस्टर मैनेजर रोली शुक्ला और उनके पति वीरेंद्र ने मिलकर कार्यालय की अलमारी से चेकबुक चुराई। सुनीला कुमारी का कहना है कि इन लोगों ने उनके फर्जी हस्ताक्षर बनाए और 16 लाख 9 हजार 80 रुपये अलग-अलग वेंडरों के खातों में ट्रांसफर कर दिए। सुनीला कुमारी ने बताया कि इस बड़े सिंडिकेट के खिलाफ आवाज उठाना आसान नहीं था। स्थानीय स्तर पर सुनवाई न होने और न्याय में देरी को देखते हुए उन्होंने बाराबंकी पुलिस अधीक्षक से संपर्क किया। एसपी के सख्त निर्देश के बाद ही पुलिस ने इस मामले में मुकदमा दर्ज किया है। अध्यक्ष ने इस मामले में खंड विकास अधिकारी और ब्लॉक मिशन मैनेजर को भी साक्ष्यों के साथ अवगत कराया है, जिसके बाद दोषियों पर जांच तेज हो गई है। आजीविका महिला क्लस्टर का खाता बैंक ऑफ इंडिया की सूरतगंज शाखा में है। इस खाते के संचालन के लिए चेकबुक और मुहर जिस अलमारी में रखे जाते थे, उसकी चाबी अध्यक्ष के साथ-साथ मैनेजर रोली और अकाउंटेंट आरती के पास भी रहती थी। आरोप है कि इसी विश्वास का फायदा उठाकर फर्जी हस्ताक्षर किए गए। यह भी आरोप है कि बैंक सखी सरस्वती देवी और पूर्व बैंक प्रबंधक जितेंद्र कुमार सिंह की मिलीभगत से यह बड़ी रकम रिंकू ट्रेडर्स, विक्की अवस्थी और महालक्ष्मी स्वयं सहायता समूह जैसे बाहरी खातों में भेजी गई। पुलिस फिलहाल इस सिंडिकेट के हर सदस्य की भूमिका की पड़ताल कर रही है।
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