जालंधर में इंडियन नेशनल ट्रस्ट फॉर आर्ट एंड कल्चरल हेरिटेज (INTACH), जालंधर चैप्टर की तरफ से गेहूं क्रांति के जनक माने जाने वाले प्रसिद्ध वैज्ञानिक डॉ. दिलबाग सिंह अटवाल की याद में उनके पैतृक गांव कल्याणपुर में एक विशेष कार्यक्रम किसान मिलनी बैसाखी का आयोजन किया गया।
इसमें प्राकृतिक खेती और पर्यावरण संरक्षण पर जोर दिया गया। कार्यक्रम के दौरान इंटैक जालंधर चैप्टर के संयोजक एडवोकेट हरप्रीत सिंह बल ने विरासती खेती अपनाने पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि आज पंजाब की मिट्टी, पानी और हवा को बचाने की सख्त जरूरत है, जो हमारी असली कुदरती विरासत है। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे प्रदूषण मुक्त और शुद्ध खेती की ओर लौटें ताकि आने वाली पीढ़ियों को स्वस्थ वातावरण मिल सके। विशेषज्ञों ने दिए आधुनिक खेती के गुर
इस मौके पर केंद्रीय आलू अनुसंधान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. प्रितम कुमार ने किसानों को बेहतर आलू बीज तैयार करने की विधि समझाई। साथ ही उन्होंने कीटनाशकों के कम से कम उपयोग और खाद के संतुलित इस्तेमाल के बारे में जागरूक किया। बागवानी विभाग से डॉ. अमरजीत सिंह ने जैविक मधुमक्खी पालन के महत्व और लाभों पर चर्चा की। उन्होंने जिले में बागवानी को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा चलाई जा रही विभिन्न लाभकारी योजनाओं की भी विस्तृत जानकारी दी। पंजाब का पानी बचाने के लिए की गई अपील
मुख्य कृषि अधिकारी डॉ. जसविंदर सिंह ने गिरते भू-जल स्तर पर चिंता व्यक्त करते हुए किसानों को ऐसी फसलें उगाने के लिए प्रेरित किया जिनमें पानी की खपत कम होती है। अंत में, को-कन्वेनर मेजर जनरल बलविंदर सिंह ने पंजाब की अनाज गुणवत्ता और पुराने समय की गौरवमयी खेती की विरासत को याद करते हुए सभी का आभार व्यक्त किया। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्थानीय किसानों और विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया।
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