इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मथुरा के जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) के आचरण पर कड़ी टिप्पणी करते हुए उन्हें व्यक्तिगत रूप से हाजिर होने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान की एकल पीठ ने कुशल सिंह की याचिका की सुनवाई करते हुए पारित किया। न्यायालय ने 30 जनवरी 2026 को याची के निलंबन आदेश पर रोक लगा दी थी, जिसे वर्तमान आदेश में भी अगली तिथि तक बढ़ा दिया गया है। न्यायालय ने पाया कि बीएसए, मथुरा ने न्यायालय के निर्देशों का समुचित पालन नहीं किया। अदालत के समक्ष प्रस्तुत अभिलेखों के अनुसार, बीएसए द्वारा शिक्षकों की अनुपस्थिति के बावजूद उनकी उपस्थिति दर्ज कराने हेतु बार-बार संदेश भेजे जाने का आरोप है। इस संबंध में स्पष्टीकरण देने के बजाय अधिकारी ने जल्दबाजी में 23 फरवरी 2026 को जांच पूरी कराकर रिपोर्ट न्यायालय में प्रस्तुत कर दी। बीएसए ने खुद को बचाने को कार्रवाई की न्यायालय ने इस आचरण को गंभीरता से लेते हुए कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि बी एस ए ने स्वयं को बचाने के उद्देश्य से यह कार्रवाई की है। परिणामस्वरूप, अदालत ने बीएसए, मथुरा को 27 अप्रैल 2026 को व्यक्तिगत हलफनामा सहित उपस्थित होने का निर्देश दिया है। साथ ही, स्पष्ट किया है कि यदि याचिकाकर्ता को किसी प्रकार से परेशान किया जाता है, तो वह इसे शपथपत्र के माध्यम से रिकॉर्ड पर ला सकता है। मामले की अगली सुनवाई 27 अप्रैल 2026 को निर्धारित की गई है,।
Source link