पूर्वी चंपारण के ऐतिहासिक एवं धार्मिक महत्व वाले सीताकुंड धाम के पुनर्विकास कार्य में तेजी लाने के लिए जिलाधिकारी सौरभ जोरवाल ने स्थल का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने निर्माण कार्यों की प्रगति और गुणवत्ता का बारीकी से जायजा लिया, साथ ही संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। बिहार राज्य पर्यटन विकास निगम द्वारा इस महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल का विकास लगभग 12.93 करोड़ रुपये की लागत से किया जा रहा है। इस परियोजना का उद्देश्य सीताकुंड धाम को आधुनिक सुविधाओं से युक्त एक आकर्षक पर्यटन स्थल के रूप में स्थापित करना है, जिससे स्थानीय पर्यटन को बढ़ावा मिल सके। 37 मीटर के गोल आकार में पुनर्निर्माण परियोजना के तहत सीताकुंड तालाब का 37 मीटर के गोल आकार में पुनर्निर्माण किया जा रहा है। तालाब के चारों ओर बलुआ पत्थर की सीढ़ियाँ, मजबूत सुरक्षा रेलिंग और आकर्षक जाली युक्त परिधि दीवार का निर्माण हो रहा है। इसके अलावा, मुख्य द्वार से तालाब तक दो लेन की चौड़ी सड़क बनाई जा रही है, जिससे श्रद्धालुओं की आवाजाही सुगम हो सके। 2700 वर्गफीट का कैफेटेरिया होगा पर्यटकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए परिसर में छायादार शेड, बैठने की समुचित व्यवस्था, लगभग 2700 वर्गफीट का कैफेटेरिया, दो कॉटेज, दो शौचालय परिसर तथा 12 दुकानों का निर्माण भी किया जा रहा है। इन सभी सुविधाओं के तैयार होने के बाद श्रद्धालुओं और पर्यटकों को एक ही स्थान पर बेहतर और आधुनिक व्यवस्था उपलब्ध हो सकेगी। निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने कार्य की गुणवत्ता सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कार्यपालक अभियंता, भवन प्रमंडल मोतिहारी को निर्देश दिया कि वे एसडीओ चकिया एवं पर्यटन प्रभाग की प्रभारी के साथ संयुक्त रूप से निर्माण कार्य का विस्तृत गुणवत्ता प्रतिवेदन प्रस्तुत करें। धाम के स्वरूप को मिलेगा नया आयाम जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि किसी भी स्तर पर गुणवत्ता में समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यह परियोजना न केवल सीताकुंड धाम के स्वरूप को नया आयाम देगी, बल्कि पूर्वी चंपारण की सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान को भी सशक्त बनाएगी। साथ ही, इससे क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।
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