पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट द्वारा साल 2015 के बरगाड़ी बेअदबी मामले से जुड़े कोटकपूरा गोलीकांड केस की सुनवाई फरीदकोट से चंडीगढ़ की जिला कोर्ट में भेजे जाने के फैसले पर बहिबल इंसाफ मोर्चा ने राज्य सरकार को घेरा है। मोर्चे ने आरोप लगाया कि सरकार इस मामले में सही तरीके से पैरवी करने में विफल रही है। हाईकोर्ट के फैसले के बाद मोर्चे का संयोजक और गोलीकांड पीड़ित परिवार के सदस्य सुखराज सिंह नियामीवाला ने कहा कि आम आदमी पार्टी ने सत्ता में आने पर 24 घंटे के भीतर इंसाफ दिलाने का वादा किया था। लेकिन 4 साल से अधिक समय बीत जाने के बावजूद न तो इंसाफ मिला और न ही जांच पूरी हो सकी। गवाहों को चंडीगढ़ की कोर्ट में पेश होना पड़ेगा आरोपियों की याचिका पर केसों का चंडीगढ़ ट्रांसफर होना चिंताजनक है। अब इन केसों से जुड़े 200 से 300 गवाहों को चंडीगढ़ की कोर्ट में पेश होना पड़ेगा। जिससे उनकी सुरक्षा और सुविधा पर सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने आशंका जताई कि इससे केस की सुनवाई प्रभावित हो सकती है और आरोपियों को इसका फायदा मिल सकता है। उन्होंने कहा कि सत्ताधारी नेताओं द्वारा स्टेजों पर विरोधियों पर आरोप लगाकर इंसाफ दिलाने के लिए बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं। नया कानून लाने की तैयारी की जा रही है लेकिन में जमीनी स्तर पर सरकार की उपलब्धि शून्य नजर आई है। वादे के बारे में AAP नेताओं से सवाल पूछे जाने चाहिए बहिबल इंसाफ मोर्चे के संयोजक सुखराज सिंह नियामीवाला ने यह भी कहा कि सरकार की अनदेखी के कारण पहले बरगाड़ी बेअदबी मामला और फिर बहिबल कलां गोलीकांड के केस भी फरीदकोट से बाहर शिफ्ट किए गए और अब कोटकपूरा मामले भी चंडीगढ़ चले गए हैं। इसके लिए उन्होंने सीधे तौर पर राज्य सरकार को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने कोर्ट में दायर याचिकाओं पर सही तरीके से कार्रवाई नहीं की। साथ ही उन्होंने पंजाब के लोगों से अपील की कि वे अपने क्षेत्रों में आने वाले आम आदमी पार्टी के मंत्रियों, विधायकों और नेताओं से सवाल पूछें कि वादों के बावजूद अब तक इन मामलों में इंसाफ क्यों नहीं दिलाया गया।
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