शहर की सांस्कृतिक परंपराओं को आगे बढ़ाते हुए भारतीय जन जागरण समिति द्वारा गुलाब बाड़ी में ‘गुलाबी शाम’ कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में गुलाब की पंखुड़ियों की खुशबू और मधुर संगीत के बीच श्रोताओं ने देर रात तक सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का आनंद लिया। मुख्य अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. नीरज माधव ने कहा कि काशी की आत्मा संगीत और संस्कृति में बसती है। यहां के लोगों की धड़कनों में संगीत रचा-बसा है, जो हर आयोजन को खास बना देता है। गुलाब बाड़ी का यह आयोजन होली के उल्लास को आगे बढ़ाने वाला रहा, जहां गुलाबी परिधानों में सजे लोगों ने बसंत ऋतु का स्वागत किया। मंच पर संगीत साधकों ने अपनी प्रस्तुति से समां बांध दिया। खास तौर पर ‘एहि ठइयां मोतिया हिराइल’ और ‘सैंया से नैना लड़े’ जैसे गीतों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। बनारस की पारंपरिक संगीत शैली और लोकधुनों ने माहौल को और भी जीवंत बना दिया। कार्यक्रम में कवि सम्मेलन भी आयोजित किया गया, जिसमें आनंद कृष्ण, उद्भव तिवारी, फुतेला बनारसी समेत कई कवियों ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को खूब गुदगुदाया। हास्य-व्यंग्य के साथ प्रस्तुत कविताओं ने दर्शकों की खूब तालियां बटोरीं। इस अवसर पर मनोज श्रीवास्तव ने अतिथियों का स्वागत किया। कार्यक्रम के सफल आयोजन में समिति के कई पदाधिकारियों और सदस्यों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। अंत में आयोजकों ने सभी प्रतिभागियों और दर्शकों का आभार व्यक्त किया। गुलाब की महक और सुरों की मिठास से सजी ‘गुलाबी शाम’ ने काशी की सांस्कृतिक धरोहर को एक बार फिर जीवंत कर दिया।
Source link