हनुमानगढ़ में समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीद को लेकर विवाद गहरा गया है। किसान, व्यापारी और मजदूर संगठन मंडी में धरने पर बैठ गए हैं, जिससे खरीद व्यवस्था प्रभावित हो रही है और प्रशासन पर दबाव बढ़ गया है। धरने पर बैठे संगठनों का कहना है कि स्लॉट सिस्टम खत्म होने के बावजूद जमीनी स्तर पर स्थिति नहीं बदली है। अब रजिस्ट्रेशन की तारीख के आधार पर खरीद की जा रही है, जो एफसीएफओ (फर्स्ट कम फर्स्ट आउट) सिस्टम नहीं है। इससे कई किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। किसानों ने बायोमैट्रिक सत्यापन व्यवस्था को भी एक बड़ी समस्या बताया है। तकनीकी खामियों के कारण कई बार सत्यापन नहीं हो पाता, जिससे किसान घंटों तक मंडी में परेशान होते हैं। इसके अलावा, खरीद पोर्टल में एंट्री को लेकर भी लगातार दिक्कतें आ रही हैं, जिससे पूरी खरीद प्रक्रिया बाधित हो रही है।
एक अन्य प्रमुख मुद्दा प्रति बीघा खरीद सीमा का है। किसान और व्यापारी दोनों ही इस सीमा से असंतुष्ट हैं। उनका कहना है कि हनुमानगढ़ जिले में प्रति बीघा उत्पादन अधिक होता है, लेकिन निर्धारित सीमा के कारण पूरी उपज की खरीद नहीं हो पा रही है, जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान हो रहा है। संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। इसी क्रम में, सोमवार को मंडी में गेहूं खरीद पूरी तरह बंद रखने का निर्णय लिया गया है। इसके साथ ही, कलेक्ट्रेट के सामने प्रतीकात्मक रूप से गेहूं की बोली लगाकर विरोध दर्ज कराया जाएगा। धरने के कारण मंडी में आवक होने के बावजूद खरीद बंद है, जिससे किसानों और व्यापारियों में रोष बढ़ता जा रहा है।
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