जमुई जिले के खैरा प्रखंड अंतर्गत हरिणी पंचायत में जिला विधिक सेवा प्राधिकार (DLSA) द्वारा एक विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर में ग्रामीणों को किशोर न्याय और बच्चों को गोद लेने से संबंधित कानूनी अधिकारों की विस्तृत जानकारी दी गई। कार्यक्रम में प्राधिकार के पैनल अधिवक्ता अंजनी कुमार और पारा विधिक सेवक दिलीप कुमार ने विभिन्न कानूनी प्रावधानों पर प्रकाश डाला। उन्होंने विशेष रूप से किशोर न्याय (देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम, 2000 की धारा 63 के तहत बच्चों को गोद लेने की प्रक्रिया और उनके अधिकारों के बारे में बताया। अधिवक्ता ने स्पष्ट किया कि गोद लिए गए बच्चे को जैविक संतान के समान सभी अधिकार प्राप्त होते हैं, जिसमें संपत्ति में हिस्सा भी शामिल है। गोद लेने से पहले, संबंधित समिति द्वारा अभिभावकों की आर्थिक और सामाजिक स्थिति का आकलन किया जाता है ताकि बच्चे का भविष्य सुरक्षित हो सके। इसके अतिरिक्त, किशोरों से जुड़े मामलों के लिए विशेष किशोर पुलिस इकाई (SJPU) की भूमिका पर भी चर्चा की गई। यह इकाई प्रशिक्षित होती है और किशोर अपराध से संबंधित मामलों की संवेदनशीलता के साथ जांच करती है। शिविर में यह भी जानकारी दी गई कि जिला विधिक सेवा प्राधिकार द्वारा विधि-विरुद्ध किशोरों को निःशुल्क कानूनी सहायता उपलब्ध कराई जाती है। ग्रामीणों को राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) की विभिन्न निःशुल्क कानूनी सहायता योजनाओं के बारे में भी जागरूक किया गया।
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