चंडीगढ़ नगर निगम (MC) में हुए 116 करोड़ रुपये के फर्जी फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) घोटाले को लेकर बुधवार को होने वाली जनरल हाउस की मीटिंग काफी हंगामेदार रहने वाली है। निगम प्रशासन इस बैठक में घोटाले की पूरी डिटेल रिपोर्ट पार्षदों के सामने रखेगा। इस रिपोर्ट में न सिर्फ घोटाले की पूरी कहानी होगी, बल्कि अब तक हुई रिकवरी और दोषियों पर की गई कार्रवाई भी पेश की जाएगी। बैंक की एक सूचना से खुला घोटाला यह पूरा मामला तब सामने आया जब IDFC फर्स्ट बैंक ने नगर निगम को सूचित किया कि जिन 11 एफडीआर (FDR) को निगम अपने रिकॉर्ड में दिखा रहा है, उनका बैंक के सिस्टम में कोई वजूद ही नहीं है। जांच में पता चला कि ये सभी रसीदें पूरी तरह फर्जी थीं। आरोप है कि ये फर्जी एफडीआर साल 2025 में IDFC फर्स्ट बैंक की सेक्टर-32 शाखा के तत्कालीन मैनेजर द्वारा जारी की गई थीं। जांच में हुए चौंकाने वाले खुलासे नगर निगम के सूत्रों के मुताबिक, जब बैंक स्टेटमेंट की बारीकी से जांच की गई, तो कई बड़ी गड़बड़ियां सामने आईं। 11 अप्रैल 2025 और 1 सितंबर 2025 की तीन ऐसी पेमेंट एंट्री मिलीं, जिनका टोटल 8.22 करोड़ रुपये था। यह राशि निगम के उन रिकॉर्ड्स से मेल नहीं खा रही थी, जो विभिन्न एजेंसियों को किए गए भुगतान के लिए रखे गए थे। जब चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड (CSCL) के प्रोजेक्ट बंद होने के समय जमा किए गए बयानों और बैंक के असली स्टेटमेंट का मिलान किया गया, तो कई डेबिट और क्रेडिट एंट्री संदिग्ध पाई गईं। 11 FDR निकली फर्जी जांच टीम ने कुल 116.84 करोड़ रुपये की 11 ऐसी एफडीआर की पहचान की है, जिन्हें निगम के रिकॉर्ड में तो एक्टिव एसेट (सक्रिय संपत्ति) दिखाया गया था, लेकिन 24 फरवरी 2026 को बैंक से प्राप्त आधिकारिक स्टेटमेंट में इनका कोई जिक्र नहीं था।
Source link