चंडीगढ़ में दिनदहाड़े गोलियां चलने से प्रशासक दुखी:कानून व्यवस्था खराब चल रही है, यह हमारी एफिशिएंसी को चुनौती; 100% अवैध निर्माण वाले मकान तोड़े




चंडीगढ़ में पिछले दो महीने से हो रही अपराध की वारदातों से पंजाब के गवर्नर व चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया भी दुखी हैं। उन्होंने सार्वजनिक मंच से कहा कि चंडीगढ़ की कानून व्यवस्था खराब चल रही है, हालांकि बहुत खराब कहना अन्याय होगा। उन्होंने कहा कि इतने संसाधनों के बावजूद यदि दिनदहाड़े गोलियां मारकर अपराधी भाग जाता है,तो यह हमारी कार्य कुशलता के लिए चुनौती है। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे लोग भी हैं, जो पटाखे छोड़ने के लिए पांच-सात हजार रुपये में अपना काम कर देते हैं। एक टेरर फैलाने का प्रयास हो रहा है। किस तरह मैसेज आ जाते हैं। जो बाहर बैठकर इन्हें गाइड कर रहे हैं, वे पैसा तभी रिलीज करते हैं, जब घटना को अंजाम दिया जाए और उसका वीडियो भी डाला जाए। तभी उनके पैसे पक्के होते हैं। दुर्भाग्य की बात है कि घटना भी यहीं कर रहे हैं, वीडियो भी यहीं बना रहे हैं और वही वीडियो भी डाल रहे हैं। मतलब इसके लिए न केवल जनता बल्कि लोगों को भी आगे आना होगा। वहीं, मकानों के अवैध निर्माण के मुद्दे पर कहा कि केवल उन्हीं को तोड़ा जा रहा है, जिन्होंने सौ फीसदी निर्माण किया है।
अब पांच प्वाइंट में जानिए क्या कहा प्रशासक ने 1.दो महीने से स्थिति खराब चल रही है चंडीगढ़ में पिछले दो महीने का अपराध रिकॉर्ड वास्तव में हमारे लिए भी दुखद है। हमने भी बैठकर विचार किया है। आखिर शहर में इतना सब कुछ होते हुए भी यदि दिनदहाड़े गोलियां मारकर कोई व्यक्ति निकल जाए, भले ही बाद में कहीं से पकड़ लिया जाए, तो यह हमारी एफिशिएंसी को चुनौती है। एफिशिएंसी तो यह है कि उसे बॉर्डर के अंदर ही पकड़ लिया जाए। हमारे पास साधन हैं कि एक-दो मिनट में सूचना कन्वे की जा सके। हमारी अलर्टनेस ऐसी होनी चाहिए कि यहां से कोई व्यक्ति गाड़ी चढ़कर भाग जाए, पैदल निकल जाए या बस में बैठकर फरार हो जाए, तो उसे तुरंत पकड़ लिया जाए। पकड़ लेना अलग बात है, लेकिन यह चुनौती आपके लिए नहीं, हमारे लिए है। हमने विचार किया कि पहले 18 नाके लगाए जा रहे थे, अब सभी स्थानों पर नाके लगाए गए हैं, इसके अलावा फोर्स भी डिप्लॉई की गई है। अभी तक इसमें ज्यादा सफलता नहीं मिली है। छापेमारी की गई है और वांछित लोगों को भी पकड़ा गया है। चंडीगढ़ की कानून व्यवस्था खराब चल रही है, हालांकि बहुत खराब कहना अन्याय होगा। 2. पांच-सात हजार में पटाखे छोड़ रहे हैं गवर्नर ने कहा कि कुछ पंजाब का असर हमारे पास भी आया है। ऐसे लोग भी हैं जो पटाखे छोड़ने के लिए पांच-सात हजार रुपये में अपना काम कर देते हैं। लेकिन एक टेरर फैलाने का प्रयास हो रहा है। किस तरह मैसेज आ जाते हैं, जो बाहर बैठकर इन्हें गाइड कर रहे हैं। वे पैसा तभी रिलीज करते हैं जब घटना को अंजाम दिया जाए और उसका वीडियो भी डाला जाए। तभी उनके पैसे पक्के होते हैं। दुर्भाग्य की बात है कि घटना भी यहीं कर रहे हैं, वीडियो भी यहीं बना रहे हैं और वही वीडियो भी डाल रहे हैं। मतलब इसके लिए न केवल जनता बल्कि लोगों को भी आगे आना होगा। पंजाब सरकार द्वारा जारी 28 गैंगस्टरों की सूची पर उन्होंने कहा कि काम वे भी कर रहे हैं और काम हम भी कर रहे हैं। लॉ एंड ऑर्डर अच्छा बने, यह हमारी भी कोशिश है, लेकिन कब पूरी तरह से बनेगा, इसके बारे में निश्चित रूप से कुछ कहना मुश्किल है। 3. अब सारी बसें इलेक्ट्रिक करने की तैयारी प्रदूषण के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि काफी प्रयास किए गए हैं। आने वाले एक साल में सारी बसें इलेक्ट्रिक कर दी जाएंगी। सोलर ऊर्जा के माध्यम से भी काम किया जा रहा है। हरियाली बढ़ाने के लिए पांच लाख पौधे लगाए गए हैं। 4. जिन्होंने 100% अवैध निर्माण वाले घर तोड़े चंडीगढ़ में घर तोड़ने के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि हम भी चाहते हैं कि 1200 लोगों के घर न तोड़े जाएं, क्योंकि तोड़ना उचित भी नहीं है। घर बनाना बहुत मुश्किल होता है और किसी व्यक्ति की सबसे बड़ी संपत्ति उसका घर होता है। लेकिन लोगों ने सरकारी जमीन पर तीन-तीन मंजिला घर बना दिए हैं। अब यदि शहर को अच्छा रखना है, तो नियमों का पालन भी आवश्यक है, अन्यथा यह शहर ताबूत बन जाएगा। हमारी भी कुछ मजबूरियां हैं। हमने कोशिश की कि जितनी वायलेशन को नजरअंदाज किया जा सकता है, उतनी छूट दी जाए और हम इस प्रक्रिया में आगे बढ़ रहे हैं। जब सभी पार्टियों ने हमारे खिलाफ दंगल शुरू कर दिया, तो हमने कहा कि चलो दंगल देख लेते हैं। मेरा स्वभाव अड़ियल प्रकार का है, लेकिन मैं संवेदनशील भी हूं। कोई हमें डराने की कोशिश करे, तो हमने वह भी सीख नहीं रखा है। सभी पार्टियां एकजुट हो गईं, लेकिन उन्हें बात समझने का प्रयास करना चाहिए। हमने स्वयं कहा कि कुछ नमूने प्रस्तुत करने पड़ेंगे और कोर्ट में एफिडेविट भी दाखिल करने पड़ेंगे। हमने उनके खिलाफ कार्रवाई शुरू की है, जिन्होंने 100 प्रतिशत सरकारी जमीन पर निर्माण किया है। इसके अलावा किसी अन्य को तोड़े जाने का उदाहरण नहीं है। ऐसा नहीं है कि हमारे अंदर मानवीय संवेदना नहीं है।
5. हर महीने मिलने का समय दिया प्रशासन ने कहा कि इस संस्था से हर महीने बैठक करेंगे। वे अकेले नहीं होंगे, बल्कि कई समस्याएं ऐसी हैं जिनका समाधान मिल-बैठकर किया जा सकता है।



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