चंडीगढ़ में बी-1 टेस्ट से प्रमोशन पर मचा बवाल:कैट के फैसले के बाद रिजल्ट जल्द,सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी में जवान,पहले वरिष्ठता से प्रमोशन




चंडीगढ़ पुलिस में कांस्टेबल से हेड कांस्टेबल पद पर प्रमोशन को लेकर बी-1 टेस्ट का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है। सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (कैट) द्वारा लंबित याचिकाओं का निपटारा किए जाने के बाद अब विभाग जल्द ही बी-1 टेस्ट का रिजल्ट घोषित करने की तैयारी में है। इसके साथ ही योग्य जवानों को कोर्स पर भेजने की प्रक्रिया भी शुरू की जा सकती है। इस पूरे मामले में पहले पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट भी दखल दे चुका है और उसने याचिकाओं को खारिज करते हुए साफ कहा था कि मामला ट्रिब्यूनल में विचाराधीन है, जहां अंतिम फैसला होना है। अब कैट के निर्णय के बाद प्रमोशन का रास्ता लगभग साफ हो गया है। 70% वरिष्ठता, 25% टेस्ट-5% खेल कोटा से प्रमोशन नए नियमों के तहत अब हेड कांस्टेबल पद पर प्रमोशन के लिए 70 प्रतिशत वेटेज वरिष्ठता को, 25 प्रतिशत बी-1 टेस्ट को और 5 प्रतिशत खेल कोटा को दिया जाएगा। चंडीगढ़ पुलिस में करीब 3600 कांस्टेबल हैं, जिनमें से 1272 जवानों ने बी-1 टेस्ट दिया था। सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी में जवान सूत्रों के मुताबिक आईआरबी (इंडियन रिजर्व बटालियन) के कुछ जवान कैट के फैसले से असंतुष्ट हैं और अब वे सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने की तैयारी कर रहे हैं। हालांकि 2007-08 में भर्ती हुए कई कांस्टेबल इस बार विरोध में सामने नहीं आए हैं, क्योंकि उन्हें पहले ही हेड कांस्टेबल के पद पर प्रमोशन मिल चुका है। चंडीगढ़ पुलिस में हेड कांस्टेबल के करीब 500 पद खाली हैं। इनमें से कई पदों पर अभी तक स्थायी नियुक्ति नहीं हुई है। विभाग इन पदों को भरने के लिए बी-1 टेस्ट के रिजल्ट का इंतजार कर रहा है। वहीं, साल 2023 में भर्ती करीब 700 नए जवान भी जल्द ही इस टेस्ट के लिए पात्र हो जाएंगे। पहले सिर्फ वरिष्ठता से होती थी प्रमोशन पहले कांस्टेबलों की प्रमोशन केवल वरिष्ठता के आधार पर होती थी। लेकिन साल 2023 में प्रशासन ने 31 मई और 15 जून को सर्कुलर जारी कर बी-1 टेस्ट अनिवार्य कर दिया। इसके लिए ऑनलाइन आवेदन मांगे गए और पंजाब यूनिवर्सिटी द्वारा परीक्षा आयोजित करवाई गई थी। हालांकि हाईकोर्ट ने मामले के लंबित होने के चलते रिजल्ट पर रोक लगा दी थी। बी-1 टेस्ट का सबसे ज्यादा विरोध उन जवानों द्वारा किया जा रहा है, जो 10 से 15 साल से कांस्टेबल पद पर कार्यरत हैं। उनका कहना है कि वे अनुभव के आधार पर प्रमोशन के हकदार हैं और अब उन्हें नए भर्ती जवानों के साथ प्रतिस्पर्धा करनी पड़ रही है, जो उनके लिए मुश्किल है। जानिए क्या था पूरा मामला साल 2021 में प्रमोशन के नियमों में बदलाव किया गया था, जिसके तहत बी-1 टेस्ट को शामिल किया गया। 2007-08 बैच के कांस्टेबलों ने इन नियमों को चुनौती देते हुए पहले कैट में याचिका दायर की, लेकिन वहां से उन्हें राहत नहीं मिली। इसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया, जहां से भी उनकी याचिका खारिज कर दी गई।



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