भास्कर न्यूज | गोपालगंज जिले में अवैध रूप से संचालित निजी क्लिनिकों के खिलाफ एक बार फिर प्रशासन सक्रिय हुआ है। लगातार मिल रही शिकायतों के बाद जांच के लिए टीम गठित की गई है। सिविल सर्जन बीरेन्द्र प्रसाद का दावा है कि बिना लाइसेंस संचालित क्लिनिकों की पहचान कर कड़ी कार्रवाई की जाएगी, लेकिन जमीनी हकीकत अब तक अलग तस्वीर पेश कर रही है। जिले में जहां एक ओर सरकारी और निबंधित अस्पतालों की संख्या सीमित है, वहीं दूसरी ओर अवैध क्लिनिकों का नेटवर्क तेजी से फैलता जा रहा है। स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर मरीजों की जान से खिलवाड़ की आशंका लगातार बनी हुई है। चार महीनों में एक दर्जन छापेमारी के बावजूद एक भी प्राथमिकी दर्ज न होना प्रशासनिक कार्रवाई पर सवाल खड़ा करता है। अब देखना होगा कि गठित टीम सिर्फ औपचारिकता निभाती है या वास्तव में अवैध क्लिनिकों पर ठोस कार्रवाई कर स्वास्थ्य व्यवस्था को दुरुस्त करती है। जिले में अस्पतालों की स्थिति जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की तस्वीर सीमित संसाधनों में सिमटी हुई है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, जिले में कुल 3 सरकारी अस्पताल और 4 निबंधित निजी अस्पताल ही संचालित हैं। इन पंजीकृत अस्पतालों में एक भोरे, एक मीरगंज तथा 2 जिला मुख्यालय पर स्थित हैं। निजी अस्पतालों को संचालन की अनुमति पटना स्थित स्वास्थ्य विभाग द्वारा लाइसेंस जारी कर दी जाती है। टीम करती है छापेमारी ^शिकायत मिलने पर जांच टीम गठित कर छापेमारी की जाती है। अभी तक किसी मामले में प्राथमिकी दर्ज नहीं हुई है। -डॉ. बीरेन्द्र प्रसाद, सिविल सर्जन, गोपालगंज अद्यतन स्थित एक नजर में {कुल सरकारी अस्पताल: 3 {निबंधित निजी अस्पताल: 4 तीन माह में छापेमारी: करीब 12 स्थान {कार्रवाई: 0 जांच टीम का नेतृत्व: एसडीओ टीम में शामिल विभाग: स्वास्थ्य विभाग और पुलिस एक पर भी दर्ज नहीं हुई प्राथमिकी हालांकि इन कार्रवाइयों के बावजूद अवैध क्लिनिकों पर पूरी तरह लगाम नहीं लग पाई है, जिससे कार्रवाई की प्रभावशीलता पर सवाल उठने लगे हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि लगातार छापेमारी और जांच के बावजूद निजी अस्पतालों के खिलाफ एक भी प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई है। इसकी पुष्टि स्वयं सिविल सर्जन डॉ. बीरेन्द्र प्रसाद ने की है। ऐसे में यह बड़ा सवाल खड़ा होता है कि जब शिकायतें मिल रही हैं और जांच भी हो रही है, तो फिर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही ? क्या अवैध क्लिनिकों को किसी स्तर पर संरक्षण मिल रहा है या सिस्टम में ही कहीं ढिलाई है?
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