छतरपुर नगर के सटई रोड निवासी मृत्युंजय मिश्रा के घर बेटी के जन्म पर ऐसा जश्न मनाया गया, जिसने पूरे शहर का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। आमतौर पर बेटे के जन्म पर होने वाली धूमधाम को पीछे छोड़ते हुए इस परिवार ने बेटी के स्वागत में बारात जैसा माहौल बना दिया और समाज को एक सकारात्मक संदेश दिया। 20 साल बाद लड़की पैदा हुई करीब 20 साल के लंबे इंतजार के बाद परिवार में बेटी का जन्म हुआ। इस खास मौके को यादगार बनाने के लिए परिवार के लोग दो दर्जन से अधिक गाड़ियों के काफिले के साथ अस्पताल पहुंचे। जब मां और नवजात बेटी को घर लाया गया, तो आगे-आगे डीजे की धुन पर नाचते-गाते लोग और पीछे गाड़ियों की लंबी कतार देखने को मिली। बारात जैसा दिखा काफिला शहर की सड़कों पर जैसे ही यह काफिला गुजरा, लोग एक पल के लिए हैरान रह गए। उन्हें लगा कि किसी की शादी की बारात निकल रही है, लेकिन जब सच्चाई सामने आई, तो हर कोई इस अनोखे जश्न की सराहना करता नजर आया। घर पहुंचने पर भी जश्न का माहौल जारी रहा। पूरे घर को दुल्हन की तरह सजाया गया था। परिवार की महिलाओं ने आरती उतारकर मां और बेटी का भव्य स्वागत किया। इस दौरान पूरे घर में खुशियों का माहौल देखने को मिला। परिवार की सदस्य ऋचा रिछारिया ने बताया कि उनके घर ‘लक्ष्मी’ आई हैं और उन्होंने उसी तरह उनका स्वागत किया है, जैसे किसी बड़े शुभ अवसर पर किया जाता है। उन्होंने कहा कि समाज में अक्सर बेटे के जन्म पर ही ज्यादा उत्सव मनाया जाता है, लेकिन उन्होंने बेटी के जन्म को भी उतनी ही खुशी और गर्व के साथ मनाया है। समाज के लिए बना प्रेरणा यह आयोजन सिर्फ एक पारिवारिक खुशी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि समाज के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण बन गया। यह संदेश देता है कि बेटियां भी उतनी ही सम्मान और खुशी की हकदार हैं, जितने बेटे।
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