डीग नगर परिषद ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर जारी एक आवासीय पट्टा रद्द कर दिया है। परिषद ने मौके पर “संपत्ति नगर परिषद डीग” का बोर्ड लगाकर सरकारी भूमि पर अपना मालिकाना हक जताया है। इस कार्रवाई को सरकारी जमीन की सुरक्षा के लिए एक सख्त कदम माना जा रहा है। नगर परिषद की टीम ने मंगलवार को मौके पर यह बोर्ड लगाया। इस पर स्पष्ट रूप से “संपत्ति नगर परिषद डीग” लिखा है। परिषद के इस कदम से न केवल अपनी जमीन पर अधिकार जताया गया है, बल्कि भविष्य में किसी भी अतिक्रमण या फर्जीवाड़े पर रोक लगाने का भी संकेत दिया गया है। यह मामला एक शिकायत के बाद सामने आया। गोवर्धन मोड़ निवासी बलवीर पुत्र चुन्नीलाल को प्रशासन शहरों के संग अभियान-2012 के तहत 10 अप्रैल 2013 को पट्टा क्रमांक 121 जारी किया गया था। बाद में कॉलोनीवासियों ने शिकायत की थी कि यह पट्टा गलत दस्तावेजों के आधार पर सरकारी जमीन पर लिया गया है।
नगर परिषद द्वारा 13 फरवरी 2026 को गठित एक कमेटी की जांच में यह खुलासा हुआ कि संबंधित भूखंड मौके पर खाली पड़ा था। वहां कोई स्थायी निर्माण या निवास नहीं पाया गया। नियमानुसार 30 प्रतिशत से अधिक निर्माण भी नहीं था, जिससे पट्टा नियमों के विपरीत पाया गया। जांच में यह भी पुष्टि हुई कि यह भूमि नगर परिषद के स्वामित्व वाली सरकारी जमीन है। वर्ष 2014-15 में इस स्थान पर बाउंड्री वॉल निर्माण के लिए भुगतान भी किया जा चुका था। इन तथ्यों से स्पष्ट हुआ कि पट्टा गलत तरीके से प्राप्त किया गया था।
आयुक्त कुलदीप सिंह ने सोमवार को पट्टा क्रमांक 121 (दिनांक 10.04.2013) को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया। इसके साथ ही दानपत्र, रिलीज डीड और वयनामा को भी रद्द करने के निर्देश दिए गए हैं। कोतवाली डीग थानाधिकारी को संबंधित व्यक्ति के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कानूनी कार्रवाई करने के भी निर्देश दिए गए हैं।
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