तरनतारन में गेहूं की पराली और फसल अवशेषों को जलाने से रोकने के लिए एक अग्रिम कार्ययोजना तैयार करने हेतु बैठक आयोजित की गई। यह बैठक डिप्टी कमिश्नर तरनतारन राहुल की अध्यक्षता में हुई। बैठक के दौरान, डिप्टी कमिश्नर ने अधिकारियों के साथ गेहूं की पराली न जलाने के संबंध में विभागीय स्तर पर की जाने वाली कार्रवाई पर चर्चा की। डिप्टी कमिश्नर ने मुख्य कृषि अधिकारी को तत्काल आईईसी (सूचना, शिक्षा और संचार) गतिविधियां शुरू करने, प्रचार वैन चलाने, शिक्षा विभाग के सहयोग से स्कूली कार्यक्रम आयोजित करने और गांव स्तर पर बैठकें करने के निर्देश दिए।
पराली जलाने वाले किसानों पर होगी कार्रवाई डिप्टी कमिश्नर ने सभी सब डिविजनल मजिस्ट्रेटों (एसडीएम) को तुरंत क्लस्टर और नोडल अधिकारियों की ड्यूटी लगाने तथा पराली सुरक्षा बल का गठन करने का आदेश दिया। उन्होंने यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि गेहूं की पराली जलाने वाले किसानों के खिलाफ रेड एंट्री और चालान जैसी उचित कार्रवाई की जाए। आढ़तियों को प्रेरित करने के लिए कहा जिला मंडी अधिकारी को मंडियों में सभी आढ़तियों को प्रेरित करने के लिए कहा गया, ताकि वे किसानों को पराली न जलाने के प्रति जागरूक करें। इसी तरह, जिला विकास एवं पंचायत अधिकारी को सभी नंबरदारों और सरपंचों को प्रेरित करने का निर्देश दिया गया कि वे किसानों को इस बारे में जागरूक करें। मशीनरी किसानों तक पहुंचाने के निर्देश डिप्टी कमिश्नर ने यह भी कहा कि यदि कोई किसान ठेके पर ली गई जमीन में आग लगाता है, तो उसे तुरंत ब्लैकलिस्ट किया जाए। कोऑपरेटिव सोसाइटी के डिप्टी रजिस्ट्रार को सभी कोऑपरेटिव सोसाइटियों को सक्रिय करने और यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया कि उनमें उपलब्ध मशीनरी किसानों तक पहुंचे। गांवों को गोद लेने और आग-मुक्त बनाने का निर्देश डिप्टी डायरेक्टर केवीके तरनतारन को 10 गांवों को गोद लेने और उन्हें पूरी तरह से आग-मुक्त बनाने का निर्देश दिया गया। डिप्टी कमिश्नर ने सभी अधिकारियों से धान की पराली की तरह गेहूं की पराली न जलाने के बारे में किसानों को और अधिक जागरूक करने को कहा। इस अवसर पर मुख्य कृषि अधिकारी ने बताया कि जिले में आईईसी गतिविधियां शुरू कर दी गई हैं।
Source link