नागौर राजस्थान के सबसे कम बारिश वाले जिलों में शामिल है। कई जगह जलस्तर 700 से 1000 फीट तक गहरा है। ऐसे हालात को मात देते हुए टांकला के किसान लिखमाराम मेघवाल ने आत्मनिर्भर बनने की नई कहानी लिखी है। ताइवानी गुलाबी अमरूद, सहजन, अनार, अंजीर, नींबू और कश्मीरी सेब उगा चुके हैं। इन पेड़ों के बीच की खाली जमीन पर बाजरा, जीरा, इसबगोल और अश्वगंधा जैसी फसलें उगाकर अतिरिक्त आमदनी कर रहे हैं। केवल जीरा और इसबगोल से ही सालाना डेढ़ लाख रुपए की इनकम हो रही है। सिंचाई के लिए फार्म पौंड बनाया लिखमाराम मेघवाल के पास 1.29 एकड़ ही जमीन है। इतनी कम जमीन पर उन्होंने कुछ ऐसी फसलें भी उगा दीं, जो यहां की शुष्क जलवायु के लिहाज से अनुकूल नहीं हैं। उन्होंने सिंचाई के लिए एक फार्म पौंड बनाया। बूंद–बूंद सिंचाई पद्धति अपनाई। अब वे अनाज से लेकर फल और औषधीय फसलें ले रहे हैं। इनसे अच्छी आमदनी हो रही है। यही नहीं, आसपास के किसानों के लिए वे किसी वैज्ञानिक से कम नहीं हैं। उन्हें बीज उपलब्ध करवाते हैं व तकनीक की जानकारी देते हैं। बारिश का पानी इकट्ठा कर ड्रिप सिंचाई अपनाई लिखमाराम पहले गांव में कपड़ों की दुकान चलाते थे। कोरोना काल में यह काम ठप होने पर अपनी पैतृक जमीन पर खेती करना शुरू किया। मानसून में बाजरा, मूंग व मोठ की फसल ली। लेकिन इससे पांच सदस्यों का परिवार पालना मुश्किल था। नए सिरे से खेती के लिए बारिश का पानी एकत्र करना शुरू किया। खेत में 30×30 मीटर का एक फार्म पौंड बनाया। इसमें जमा पानी से खेत में ड्रिप सिंचाई प्रणाली और मल्चिंग तकनीक को अपनाया, जिससे पानी की लगभग 30 से 40 प्रतिशत तक बचत होने लगी। पहली बार में लाख रुपए की कमाई पहली बार अश्वगंधा से एक लाख रुपए की आमदनी हुई। रासायनिक खाद के बजाय वर्मी कम्पोस्ट और वेस्ट डिकम्पोजर का उपयोग किया। इन्होंने एकीकृत कृषि प्रणाली अपनाई, जिसमें अनाज, फलदार वृक्ष, औषधीय पौधे और पशुपालन को शामिल किया। 0.35 हेक्टेयर में सागवान के 400 पेड़ों के साथ ही ताइवानी गुलाबी अमरूद, सहजन, अनार, अंजीर, नींबू और कश्मीरी सेब के पौधे लहलहा रहे हैं। इन पेड़ों के बीच की खाली जमीन पर बाजरा, जीरा, इसबगोल और अश्वगंधा जैसी फसलें उगाकर अतिरिक्त आमदनी कर रहे हैं। केवल जीरा और इसबगोल से ही सालाना डेढ़ लाख रुपए की इनकम हो रही है। 0.6 हेक्टेयर में पायनियर बाजरा, जीरा या ईसबगोल, अश्वगंधा की खेती करते हैं। वहीं बागवानी में 0.35 हेक्टेयर में अमरूद के 150 पौधे और अनार के 35 पौधे हैं। मालाबार नीम के 20 पौधे, नींबू के 20, अंजीर के 10, बांस के 20, मोहगनी, किन्नू और चीकू के दस दस पौधे लगा रखे हैं। दो देसी गाय है, जिनका गोबर और मूत्र से खाद और रोग नियंत्रण में काम ले रहे हैं। अधिकारी भी नवाचार देखने आते हैं लिखमाराम अब औषधीय फसलों की खेती को बढ़ाएंगे। इसके लिए लखनऊ से प्रशिक्षण लिया है। इनके नवाचारी प्रयोग देखने कृषि वैज्ञानिक से लेकर प्रशासनिक अधिकारी तक आते रहे हैं। नवाचार के लिए जिला प्रशासन से पुरस्कृत हुए। इनका कहना है कि मिश्रित खेती से सालभर आमदनी होती रहती है। एक साथ सभी फसलों के खराबे की आशंका नहीं रहती।
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