फरीदकोट में वारिस पंजाब दे संस्था में वित्त सचिव रहे पंथक कार्यकर्ता गुरप्रीत सिंह हरीनौ की हत्याकांड में जिला अदालत ने पंजाब पुलिस की एसआईटी को असम की डिब्रूगढ़ जेल में केस के आरोपी व खडूर साहिब से सांसद अमृतपाल सिंह खालसा के करीबी सहयोगी वरिंदर सिंह फौजी को गवाह के रूप में पेश करने की अनुमति दे दी है। बता दें कि, गुरप्रीत सिंह हरीनौ की 9 अक्टूबर 2024 को उसके गांव में ही गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। पुलिस जांच के मुताबिक, यह हत्या खडूर साहिब के सांसद अमृतपाल सिंह खालसा के इशारे पर करवाई गई थी, जो राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत असम जेल में बंद है। तरनतारन की गोइंदवाल जेल में बंद है वरिंदर सिंह फौजी भारतीय सेना में रह चुका वरिंदर सिंह फौजी को अमृतपाल का करीबी माना जाता है और उसे भी एनएसए के तहत असम जेल भेजा गया था। बाद में उसे वहां से पंजाब लाया जा चुका है। वह वर्तमान में तरनतारन की गोइंदवाल जेल में बंद है। उस पर 2023 में अजनाला पुलिस स्टेशन पर हुए हमले के आरोप है। गुरप्रीत हत्याकांड की जांच कर रही एसआईटी का मानना है कि फौजी के पास इस हत्याकांड से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी है, जिससे मामले की जांच को मजबूती मिल सकती है। सूत्रों के अनुसार बीती 2 अप्रैल को अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने एसआईटी की अर्जी मंजूर करते हुए फौजी को प्रोडक्शन वारंट के जरिए अदालत में पेश करने की अनुमति दे दी है। केस में 17 में से 12 के खिलाफ आरोप तय हो चुके इस मामले में अब तक 17 लोगों को आरोपी बनाया गया है, जिनमें से 12 के खिलाफ आरोप तय हो चुके हैं, जबकि 5 की गिरफ्तारी बाकी है। इनमें सांसद अमृतपाल के अलावा विदेश में बैठे आतंकी अर्श डल्ला व तीन अन्य शामिल है। जांच में यह भी सामने आया है कि मृतक गुरप्रीत सिंह पहले वारिस पंजाब दे से जुड़ा था, लेकिन बाद में उसने अमृतपाल की आलोचना शुरू कर दी थी, जो कथित तौर पर उसकी हत्या की वजह बनी।
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