'बदला के लिए शादी नहीं की, कलेजा निकालकर थाना जाता':एयरफोर्स के रिटायर्ड सार्जेंट पर हमला, आरोपी बोला- भाइयों को मारता था, 20 साल से इंतजार था




‘सीना चीरकर इसका कलेजा निकालता, फिर हाथ में लेकर थाना जाकर सरेंडर करता, लेकिन थोड़ा चूक गया। ये मेरे भाइयों को बंद कमरे में कोड़ा से मारता था। 20 साल से बदले की आग में मैं जल रहा था। कई बार रेकी भी की, हत्या की कोशिश की, लेकिन सफल नहीं हो पाया। इस दिन के लिए मैंने शादी तक नहीं की, जॉब भी छोड़ दी थी। मेरे कानों में आज तक मेरे भाइयों को मारे गए कोड़े की आवाज गूंजती है। ये मेरी मां को किचन में बंद कर देता था।’ भोजपुर के टाउन थाना में चाकूबाजी के आरोपी अनिल शुक्ला ने सरेंडर के दौरान ये बातें कही। घायल का चल रहा इलाज, तस्वीरें… एयरफोर्स के रिटायर्ड सार्जेंट को चाकू मारा था दरअसल, शांति नगर मोहल्ले में मंगलवार की देर शाम एयरफोर्स के रिटायर्ड सार्जेंट को चाकू मारा। रिटायर्ड सार्जेंट के गर्दन, दो जगह सीने में, छह जगह आंत में चाकू मारा गया। आंत बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है। खून से लथपथ रिटायर्ड सार्जेंट को शहर के बाबू बाजार स्थित प्राइवेट हॉस्पिटल में एडमिट कराया है। घायल की पहचान शांति नगर मोहल्ला वार्ड नंबर-10 के रहने वाले 45 साल के अरविंद उपाध्याय के रूप में हुई है। वहीं, आरोपी की पहचान नगर थाना क्षेत्र के मौलाबाग शांतिनगर के रहने वाले विशेश्वर शुक्ला का 26 साल का बेटा अनिल शुक्ला उर्फ मनजी शुक्ला के रूप में हुई है। चाकूबाजी में आरोपी भी घायल हुआ है, जिसका इलाज सदर अस्पताल में चल रहा है। अब सिलसिलेवार तरीके से जानिए पूरी कहानी आरोपी अनिल शुक्ला उर्फ मनजी शुक्ला ने बताया कि 20 साल पहले मेरे दादा बासुदेव शुक्ला ने शहर में मेरी दादी हीरा मानो देवी के नाम पर घर बनवाया था। चचेरा चाचा अरविंद उपाध्याय और उसके परिवार के सदस्य मेरी मां और पिता से कहते थे कि तुम लोग शहर का घर छोड़ दो और गांव वाला मकान ले लो। अनिल शुक्ला ने बताया कि उस वक्त मैं छोटा था। मैं चार भाइयों में तीसरे नंबर पर हूं। अरविंद उपाध्याय की ओर से मकान छोड़ने का दबाव डाले जाने पर मेरे माता-पिता इसका विरोध करते थे। इसके बाद अरविंद उपाध्याय और उसके परिवार के सदस्य हम लोगों को प्रताड़ित करते थे। आरोपी ने बताया कि मेरी मां बोलती थी कि जब मेरी सास के नाम पर मकान बना है, तो सभी जगह की प्रॉपर्टी पर परिवार के सभी सदस्यों का बराबर हक है। इसी बात को लेकर अरविंद उपाध्याय और उनके परिवार की ओर से मेरे दोनों भाई अमरनाथ शुक्ला और अरविंद शुक्ला और 80 साल के बूढ़े दादा को कमरे में बंद कर कपड़ा उतारकर उनकी कोड़ा से पिटाई की जाती थी। उस वक्त उनकी चीख कोई सुनने वाला नहीं था। अनिल ने बताया कि मेरे पापा को घर से बाहर भेज दिया जाता था। इसके बाद मेरी मां को किचन में बंद करके रखा जाता था। उस वक्त मैं डर से कमरे के छज्जा पर चढ़ जाता था। अपने लाचार भाइयों को रोते-बिलखते देखता था, उस मेरी रूंह कांप जाती थी। मेरे भाइयों के पीठ पर कोड़ा की मार से हुए गहरे निशान पर कोई मरहम लगाने तक नहीं आता था।
‘भाइयों के शरीर पर जख्म देख मैंने बदला लेने की कमस खाई थी’ आरोपी अनिल ने बताया कि भाइयों के शरीर पर कोड़ा की मार से हुए जख्म को देख मैंने बदला लेने की कसम खाई थी। मैंने मन में ठान लिया था कि जब मैं बड़ा हो जाऊंगा, अरविंद और उसके परिवार को नहीं छोडूंगा। मैं कई महीनों से रिटायर्ड सार्जेंट की रेकी कर रहा था, अचानक मुझे अरविंद दिख गया। उसने कहा कि मुझे कोई अफसोस नहीं है, जेल ही मेरा घर है। तभी मैंने वारदात को अंजाम देने के बाद थाना जाकर सरेंडर किया है। चाकूबाजी का आरोपी अनिल शुक्ला कुल चार भाई हैं। अनिल से बड़े अमरनाथ शुक्ला गांव में ही रहते हैं। जबकि अरविंद और दीपू सीआईएसएफ में है। एक बहन शादीशुदा है। मां संध्या देवी घर पर रहती है। अनिल ने बताया कि पहले अलग-अलग राज्यों में प्राइवेट जॉब करता था, लेकिन अपनी प्रतिज्ञा पूरी करने के लिए नौकरी छोड़कर कभी-कभी आरा आ जाता था। देर शाम घर आए थे अरविंद वहीं, घायल रिटायर्ड सार्जेंट के जीजा अजय कुमार शुक्ला ने बताया कि अरविंद देर शाम घर से आया और अपने घर में था। इसी बीच अनिल शुक्ला ने मेरे साले पर चाकू से हमला कर दिया। घायल अरविंद का इलाज कर रहे सर्जन डॉ. विकाश सिंह ने बताया कि चाकू लगने से जख्मी का खून काफी बह गया है। ऑपरेशन कर उसके डैमेज पार्ट्स को रिपेयर कर दिया गया है, पर उसे अभी ऑब्जर्वेशन में रखा जाएगा। वहीं, सदर एसडीपीओ राज कुमार साह ने बताया कि एक युवक ने पुराने घरेलू विवाद में अपने पट्टीदार पर चाकू से हमला किया है। घायल की हालत गंभीर बताई जा रही है। उधर, वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी ने खुद थाना पहुंचकर सरेंडर किया है। मामले की जांच पड़ताल जारी है।



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