बरेली में 'थर्ड आई एक्टिवेशन' शिविर, अलौकिक दावों पर सवाल:गुरु मां डॉ. सुरभि के कार्यक्रम पर विशेषज्ञों ने जताई चिंता




बरेली। पीलीभीत बाईपास स्थित एक होटल में आयोजित तीन दिवसीय “थर्ड आई एक्टिवेशन” शिविर इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। गुरु मां डॉ. सुरभि के निर्देशन में चल रहे इस कार्यक्रम में सैकड़ों प्रतिभागी आत्मिक जागरण का अनुभव लेने पहुंचे हैं, लेकिन शिविर में किए जा रहे कुछ दावों ने लोगों के बीच जिज्ञासा और बहस छेड़ दी है। आयोजकों के अनुसार, शिविर में ध्यान, ऊर्जा संतुलन और मानसिक एकाग्रता के अभ्यास कराए जा रहे हैं, जिन्हें आत्म-विकास का माध्यम बताया गया है। हालांकि, कार्यक्रम में “शक्तिपात”, बिना बोले संवाद, वस्तुओं को हिलाना या चम्मच मोड़ने जैसे अनुभवों का जिक्र सामने आने के बाद यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या यह वास्तव में आध्यात्मिक साधना है या अलौकिक शक्तियों के दावे। शिविर में शामिल कई प्रतिभागियों ने इसे जीवन बदलने वाला अनुभव बताया है। उन्होंने मानसिक शांति और आत्मविश्वास में बढ़ोतरी का दावा किया। दूसरी ओर, मनोविज्ञान और विज्ञान से जुड़े विशेषज्ञ ऐसे दावों को लेकर सतर्क रहने की सलाह देते हैं। उनका मानना है कि ध्यान और मेडिटेशन से मानसिक लाभ संभव हैं, लेकिन वस्तुओं को हिलाने या “थर्ड आई खुलने” जैसे दावों के वैज्ञानिक प्रमाण सीमित हैं। यह शिविर एक बार फिर विश्वास बनाम विज्ञान की पुरानी बहस को सामने लाता है। जहां एक ओर व्यक्तिगत अनुभव और आस्था है, वहीं दूसरी ओर वैज्ञानिक प्रमाण और तार्किकता। कुछ लोग इसे आत्मिक उन्नति का जरिया मानते हैं, जबकि अन्य इसे ‘ओवरक्लेम’ या मनोवैज्ञानिक प्रभाव का परिणाम बताते हैं। विशेषज्ञों का संतुलित नजरिया यह है कि ध्यान और आत्म-विकास कार्यक्रम फायदेमंद हो सकते हैं, लेकिन असाधारण दावों को सावधानी और विवेक से परखना आवश्यक है। किसी भी आध्यात्मिक या प्रशिक्षण कार्यक्रम में शामिल होने से पहले उसकी विश्वसनीयता और उद्देश्य को समझना महत्वपूर्ण है।



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