बेतिया राज जमीन पर सरकार का बड़ा फैसला:24 हजार एकड़ जमीन पर नियंत्रण, पुराने कब्जाधारियों को राहत; 1986 के बाद वालों पर कड़ा एक्शन




बिहार सरकार अब बेतिया राज की संपत्तियों को लेकर सख्त कदम उठाने जा रही है। डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा ने कहा है कि अब इन संपत्तियों का पूरा प्रबंधन कानूनी और पारदर्शी तरीके से होगा, ताकि अवैध कब्जों पर रोक लगे और सही लोगों को राहत मिल सके। सरकार ने “बेतिया राज संपत्ति नियमावली 2026” का ड्राफ्ट तैयार किया है। यह 2024 में बने कानून को लागू करने के लिए लाया गया है। इसका मकसद है कि बेतिया राज की जितनी भी चल-अचल संपत्तियां हैं—चाहे बिहार में हों या राज्य के बाहर—उन्हें सरकार अपने नियंत्रण में लेकर उनका सही इस्तेमाल कर सके। पहले लिस्ट, फिर आपत्ति का मौका इस पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए सरकार सबसे पहले सभी संपत्तियों की सूची सार्वजनिक करेगी। इसके बाद लोगों को 60 दिनों का समय दिया जाएगा कि अगर उन्हें कोई आपत्ति है तो दर्ज करें। जिला स्तर पर इसके लिए विशेष अधिकारी नियुक्त होंगे, जिन्हें कोर्ट जैसी शक्तियां दी जाएंगी। ये अधिकारी अधिकतम 90 दिनों के अंदर मामलों का निपटारा करेंगे। समाहर्ता लेंगे जमीन का कब्जा अगर तय समय में कोई आपत्ति नहीं आती है या खारिज हो जाती है, तो जिला प्रशासन (समाहर्ता) सीधे जमीन का कब्जा ले लेगा। इसके बाद संपत्तियों को अलग-अलग श्रेणियों में बांटा जाएगा— जैसे ऐतिहासिक संपत्ति, सरकारी उपयोग वाली जमीन, वैध पट्टाधारकों की जमीन और बिना कागज वाले कब्जे। 1986 कट-ऑफ: पुराने कब्जाधारियों को राहत सरकार ने एक अहम फैसला लेते हुए 1 जनवरी 1986 को कट-ऑफ डेट तय किया है। जो लोग इस तारीख से पहले से जमीन या मकान पर कब्जे में हैं और उनके पास वैध दस्तावेज हैं, उन्हें राहत दी जाएगी। ऐसे लोगों को तय रकम देकर जमीन को अपने नाम यानी फुल मालिकाना हक में बदलने का मौका मिलेगा। यह लंबे समय से रह रहे लोगों के लिए बड़ी राहत है। 1986 के बाद कब्जा करने वालों पर सख्ती जो लोग 1 जनवरी 1986 के बाद जमीन पर कब्जा किए हैं, उनके खिलाफ सरकार सख्त रुख अपनाएगी। ऐसे भवनों को “कब्जे में” लिया जा सकता है और कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अगर किसी के पास वैध कागज या लंबे समय का प्रमाण नहीं मिला, तो उसे अवैध कब्जाधारी मानते हुए हटाया जाएगा। ऐतिहासिक संपत्तियों का होगा संरक्षण बेतिया राज की कई संपत्तियां ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण हैं। सरकार इनका संरक्षण, मरम्मत और सुरक्षा सुनिश्चित करेगी। इसके लिए विशेषज्ञों और पुरातात्विक संस्थानों की मदद ली जाएगी, ताकि इनकी पहचान और विरासत सुरक्षित रह सके। सरकार का कहना है कि इस नियमावली के लागू होने से संपत्तियों का बेहतर प्रबंधन होगा और उनका उपयोग विकास कार्यों में किया जा सकेगा। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और अवैध कब्जों पर भी लगाम लगेगी। कहां-कहां फैली है बेतिया राज की जमीन बेतिया राज की जमीन बिहार के कई जिलों में फैली हुई है। सबसे ज्यादा जमीन पश्चिम चंपारण में है। इसके अलावा पूर्वी चंपारण, सारण, गोपालगंज, सिवान और पटना में भी इसकी संपत्तियां मौजूद हैं। कुल मिलाकर करीब 24,477 एकड़ जमीन इस दायरे में आती है, जो राज्य के लिए एक बड़ी संपत्ति मानी जाती है।



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