भारतीय सेना- 'पाकिस्तान ही नहीं, चीन के लिए भी तैयार':युद्धाभ्यास में हेलफायर मिसाइल से 8 किमी दूर टैंक नष्ट; 2000 फीट से दुश्मन के ठिकाने उड़ाए




भारतीय सेना ने जैसलमेर की पोखरण फील्ड फायरिंग रेंज में एक्सरसाइज ‘ब्रह्मास्त्र’ के तहत अपाचे अटैक हेलिकॉप्टर की मारक क्षमता का शानदार प्रदर्शन किया। यह युद्धाभ्यास गुरुवार को सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक चला। युद्धाभ्यास के दौरान AGM-114 हेलफायर मिसाइल, रॉकेट और गनफायर का उपयोग कर सटीक निशानों को भेदा गया, जो सेना की आधुनिक युद्ध क्षमता को दर्शाता है। अपाचे हेलीकॉप्टर ने 1500 से 2000 फीट की ऊंचाई से लक्ष्य साधते हुए काल्पनिक दुश्मन के ठिकानों को सफलतापूर्वक निशाना बनाया। यह युद्धाभ्यास दिखाता है कि अपाचे हेलिकॉप्टर पश्चिमी सीमा (पाकिस्तान) के रेगिस्तानी इलाकों में जितने प्रभावी हैं, उतने ही एलएसी (चीन सीमा) पर भी दुश्मन के लिए चुनौती बन सकते हैं। एंटी-एयरक्राफ्ट गनों से ड्रोन टारगेट्स को नष्ट किया ब्रिगेडियर पी.के. सिंह ने बताया कि इस अभ्यास में जमीन और हवा के बीच रियल टाइम डेटा साझा किया गया, जिससे ऑपरेशन की सटीकता और गति दोनों में सुधार हुआ। अभ्यास से पहले कई हफ्तों तक तैयारी की गई। इसमें सेना की दक्षिणी कमान की एयर डिफेंस ब्रिगेड ने हाई-इंटेंसिटी फायरिंग अभ्यास किया, जिसमें पायलटों ने सिमुलेशन के जरिए ट्रेनिंग ली और तकनीकी टीम ने रेगिस्तानी परिस्थितियों में हथियारों की जांच की। एक्सरसाइज में आधुनिक रडार और एंटी-एयरक्राफ्ट गनों से ड्रोन टारगेट्स को नष्ट किया गया। रेंज में आयोजित अभ्यास के दौरान यह दिखाया गया कि अगर दुश्मन के ड्रोन भारतीय हवाई क्षेत्र में घुसने की कोशिश करते हैं तो उनका क्या अंजाम होता है। इसमें ड्रोन के नजर आते ही एयर डिफेंस यूनिट्स ने पहले उन्हें इलेक्ट्रॉनिक तरीके से जाम किया और फिर एंटी-एयरक्राफ्ट गनों से सटीक निशाना लगाकर उन्हें आसमान में नष्ट कर दिया। खास बात यह रही कि पूरे अभ्यास के दौरान कोई भी मिसफायर नहीं हुआ, जो इसकी सफलता और उच्च स्तर की तैयारी को दर्शाता है। यूं किया युद्धाभ्यास सेना ने इस अभ्यास में उन्नत रडार सिस्टम की मदद से दूर से ही ड्रोन की लोकेशन ट्रैक की गई। इसके बाद कंट्रोल रूम में बैठे तकनीकी विशेषज्ञों ने हाई-टेक कंप्यूटर के जरिए लक्ष्य की पहचान की। उनकी ओर से मिले सटीक निर्देशों के आधार पर मिसाइल और गन से लक्ष्य को निशाना बनाकर सफलतापूर्वक भेद दिया गया। सेना की यह प्रणाली करीब 3.5 से 4 किलोमीटर तक मार करने में सक्षम है। यह ड्रोन, हेलिकॉप्टर और कम ऊंचाई पर उड़ने वाले विमानों को भी आसानी से निशाना बना सकती है।
फोटोज, युद्धाभ्यास की झलक देखें… हेलफायर मिसाइल से टैंक नष्ट पायलटों ने रणनीति के तहत ऊंचाई से दुश्मन के ठिकानों को चिन्हित किया और सटीक हमले किए। सबसे पहले अपाचे ने AGM-114 हेलफायर मिसाइल दागी। लेजर गाइडेड इस मिसाइल ने 8 किलोमीटर दूर स्थित टैंक को निशाना बनाकर खत्म किया। रॉकेट और गन से लगातार हमला इसके बाद हेलिकॉप्टर ने नीचे आकर 70 एमएम हाइड्रा रॉकेटों से हमला किया, जिससे दुश्मन के कैंप नष्ट हुए। अंत में हेलिकॉप्टर के नीचे लगी M230 चेन गन से 1200 राउंड प्रति मिनट की रफ्तार से फायरिंग कर छोटे लक्ष्यों को भी निशाना बनाया गया। पायलट के हेलमेट माउंटेड डिस्प्ले (HMD) के साथ तालमेल बैठाते हुए इस गन ने वहां मौजूद हर छोटे लक्ष्य को छलनी कर दिया। तकनीकी टीम और पायलटों की जुगलबंदी इस बड़ी सफलता के पीछे केवल बटन दबाने वाला पायलट ही नहीं, बल्कि एक पूरी फौज का दिमाग और पसीना लगा था। ब्रिगेड कमांडर ब्रिगेडियर पीके सिंह ने बताया कि इस फायरिंग से पहले हफ्तों तक गहन तैयारी की गई थी। पायलटों ने कई घंटों तक आभासी दुनिया में जटिल मिशनों का अभ्यास किया। सेना के इंजीनियरों और तकनीकी विशेषज्ञों की टीम ने रेगिस्तान की धूल और गर्मी के बीच हेलीकॉप्टर के जटिल वेपन सिस्टम और सेंसर की बारीकी से जांच की। उनकी दक्षता का ही परिणाम था कि एक भी हथियार मिसफायर नहीं हुआ। यह केवल गोलियां चलाना नहीं था, बल्कि नेटवर्क-सेंट्रिक वारफेयर का टेस्ट था, जिसमें जमीन पर मौजूद सैनिकों और हवा में उड़ रहे अपाचे के बीच डेटा का रियल-टाइम आदान-प्रदान हुआ। क्यों खास है सेना का यह ‘ब्रह्मास्त्र’? सेना के पास अब अपाचे, प्रचंड और रुद्र जैसे हेलिकॉप्टर है। अपाचे टैंकों को निशाना बनाने में सक्षम है। प्रचंड ऊंचाई वाले इलाकों में काम करता है और रुद्र छोटे ऑपरेशन के लिए उपयोगी है। रेगिस्तान से पहाड़ तक उपयोग यह अभ्यास दिखाता है कि भारतीय सेना के हेलिकॉप्टर हर परिस्थिति में तैयार हैं। सेना अब रेगिस्तान और पहाड़ी इलाकों में भी आधुनिक तकनीक के साथ मजबूती से काम करने में सक्षम है। भारतीय सेना अब केवल रक्षात्मक रणनीति तक सीमित नहीं रही, बल्कि ‘प्रो-एक्टिव’ मोड में आ चुकी है। अपाचे हेलिकॉप्टर पश्चिमी सीमा (पाकिस्तान) के रेगिस्तानी इलाकों में जितने प्रभावी हैं, उतने ही एलएसी (चीन सीमा) पर भी दुश्मन के लिए चुनौती बन सकते हैं। पोकरण की रेत पर हुआ यह अभ्यास पड़ोसी देशों के लिए- “भारतीय सेना तैयार है, आधुनिक है और अजेय है” का संदेश दिया।



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