थानों में दर्ज अपराधों में ‘स्वतंत्र गवाह’ के नाम पर फर्जीवाड़े की एक और परत खुली है। मऊगंज जिले में पहले नईगढ़ी थाने में फिक्स गवाहों के जरिए एफआईआर दर्ज करने का मामला सामने आया था। अब इसी जिले के हनुमना थाने में नया मामला सामने आया है। यहां एक दिन में 50 मिनट के भीतर पुलिस ने 50 किमी से अधिक दूरी पर कार्रवाई दिखाकर 6 केस दर्ज किए। सभी मामलों में ‘राहगीर स्वतंत्र गवाह’ लगभग वही रहे। इन मामलों में पुलिस ने अवैध शराब जब्ती की कार्रवाई दर्शाई है, लेकिन गवाह के रूप में थाना प्रभारी का वाहन चलाने वाला निजी ड्राइवर और एक स्थायी गवाह हैं। ड्राइवर राजेश साकेत और दूसरे गवाह सूर्यमणि मिश्रा का कहना है कि उन्हें इन मामलों की जानकारी नहीं है। उनका दावा है कि पहले कभी साइन करवाए गए थे। हनुमना थाने के ‘तीन परमानेंट गवाह’ 50 मिनट, 50 किमी का दायरा, जहां भी क्राइम, मौजूद थे ये गवाह अलग-अलग विवेचकों ने ये कार्रवाइयां की हैं। राजेश साकेत मेरा ड्राइवर नहीं है। थाने के सामने रहता है तो वाहनों के संबंध में आता-जाता है। सूर्यमणि मेरे आने से पहले यहां आते-जाते थे। पुलिस कार्रवाई के दौरान स्वतंत्र गवाह ही रखे जाते हैं। मामले की जांच करवाते हैं। अनिल काकड़े, प्रभारी, थाना हनुमना इधर, मऊगंज एसपी दिलीप कुमार सोनी बोले- हनुमना थाने में एक जैसे गवाहों को कई केसों में शामिल करने का मामला संज्ञान में आया है। पूरे मामले का परीक्षण करवा रहे हैं। पॉकेट गवाह की जांच में फंसे एसआई को साइबर शाखा का प्रभार
मऊगंज के नईगढ़ी थाने के प्रभारी रहे एसआई जगदीश सिंह ठाकुर पर पॉकेट गवाहों के जरिए सैकड़ों केस दर्ज करने के आरोप लगे थे। उनके कार्यकाल में ड्राइवर, सब्जी विक्रेता व कुक को गवाह बनाकर 106 केस दर्ज किए गए। ठाकुर को लाइन अटैच किया गया। अब उन्हें एसपी कार्यालय में साइबर शाखा प्रभारी और रक्षित निरीक्षक का प्रभार दिया है। एसपी बोले- पुलिस लाइन के प्रभारी आरआई अवकाश पर हैं, इसलिए प्रभार दिया। सुप्रीम कोर्ट भी पॉकेट गवाहों के मामले में नाराजगी जता चुका है। गत 19 मार्च को इंदौर के एक केस की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा था कि देशभर में गवाहों की प्रामाणिकता सुनिश्चित करने के लिए कॉमन मिनिमम प्रोसिजर बनाने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए एक कमेटी बनाई थी।
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