पीएम नरेंद्र मोदी ने अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में अमृतसर के शोधकर्ता अमित सिंह राणा का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने राणा के प्राचीन भारतीय वैदिक ज्ञान परंपरा से जुड़ी पांडुलिपियों के संरक्षण और शोध कार्य की सराहना की। इस उल्लेख से शहर में खुशी का माहौल है। मीडिया से बात करते हुए, अमित सिंह राणा ने बताया कि वे मूल रूप से उत्तर प्रदेश के कानपुर के निवासी हैं और 2013 से अमृतसर में रह रहे हैं। उन्होंने पीएम मोदी द्वारा ‘मन की बात’ में अपना नाम लिए जाने को अपने लिए गर्व का क्षण बताया और इसके लिए पीएम मोदी का आभार व्यक्त किया। देश भर में बिखरी पांडुलिपियों का कर रहे सर्वेक्षण राणा ने जानकारी दी कि वे भारत की प्राचीन वैदिक ज्ञान परंपरा से संबंधित पांडुलिपियों के संरक्षण और शोध में लगे हुए हैं। देश के विभिन्न घरों, मठों, मंदिरों, विद्यालयों और पुस्तकालयों में ऐसी कई पांडुलिपियां मौजूद हैं, जो भारत की सांस्कृतिक और बौद्धिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। वे इन पांडुलिपियों का सर्वेक्षण और अध्ययन कर रहे हैं ताकि उन्हें भविष्य की पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखा जा सके। राणा इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (IGNCA) के साथ एक रिसोर्स पर्सन के रूप में जुड़े हुए हैं और राष्ट्रीय पांडुलिपि मिशन से संबंधित कार्य कर रहे हैं। इस दौरान वे देशभर में मौजूद पांडुलिपियों की जानकारी एकत्र करते हैं और लोगों को उनके महत्व के प्रति जागरूक करते हैं। पांडुलिपियां राष्ट्रीय धरोहर, सरकार को जानकारी दें राणा ने बताया कि लोग अक्सर अपने घरों में रखी पुरानी पांडुलिपियों को निजी धरोहर समझते हैं, जबकि वास्तव में ये देश की राष्ट्रीय विरासत का अभिन्न अंग हैं। उन्होंने आम जनता से अपील की कि यदि उनके पास ऐसी कोई पांडुलिपि है, तो वे इसकी जानकारी सरकार तक पहुंचाएं, ताकि उनका उचित संरक्षण और अध्ययन किया जा सके। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में वे इस अभियान को और बड़े स्तर पर आगे बढ़ाने का प्रयास करेंगे, जिसका उद्देश्य भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा को सुरक्षित रखना और उसे आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना है।
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