गुरदासपुर में रेप, अपहरण और बंधक बनाने के मामले में दोषी व्यक्ति 20 साल बाद बरी हो गया। पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने जिला कोर्ट का फैसला पलट दिया। जिला कोर्ट ने उसे 6 साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई थी। हाईकोर्ट के ऑर्डर के अनुसार, सुनवाई के दौरान पाया कि पीड़ित महिला की पहचान ही संदिग्ध थी। जिस महिला को केस में पीड़िता बताया गया था, उसकी मौत ही घटना वाले दिन से करीब 12 साल पहले हो चुकी थी। जिस महिला को पीड़िता के तौर पर पेश किया गया, उसने अपनी पहचान छिपाई और वह फर्जी है। हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने कई अहम सबूत पेश किए, जिनमें कथित पीड़िता के नाम से जुड़ी असली महिला का मृत्यु प्रमाण पत्र, वॉडर आईडी। इसके साथ ही महिला के भाई ने भी मौत की पुष्टी की। इन्हीं तथ्यों और गवाहियों में विरोधाभास को आधार बनाते हुए हाईकोर्ट ने 9 अप्रैल 2026 को आरोपी को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। यह मामला 8 नवंबर 2002 का था, जिसमें महिला ने आरोप लगाया था कि उसे जबरन अगवा कर कई दिनों तक अलग-अलग जगहों पर ले जाकर उसके साथ रेप किया गया। जिला ने 2006 में आरोपी को दोषी मानते हुए 6 साल की सजा और जुर्माना सुनाया था। जिसके बाद आरोपी कुछ दिन जेल में रहा, फिर जमानत मिलने पर बाहर आ गया। 4 पॉइंट में जानिए रेप केस जिला कोर्ट ने 6 साल की सजा सुनाई इस केस का गुरदासपुर जिला कोर्ट में ट्रायल चला, जहां पीड़ित पक्ष ने 10 गवाह पेश किए। इसमें पीड़ित महिला स्वयं, पुलिस अधिकारी, उसका पति और डॉक्टर शामिल थे। कोर्ट ने शिकायतकर्ता महिला के मौखिक बयानों को विश्वसनीय और भरोसेमंद माना। उसने अपने बयान में अपहरण तथा बार-बार रेप के आरोप लगाए थे, जिन्हें कोर्ट ने सही माना। इसके अलावा मेडिकल रिपोर्ट भी शामिल थी। हालांकि, जिला कोर्ट में आरोपी ने महिला की पहचान पर सवाल उठाया था कि यह असली महिला नहीं है। लेकिन कोर्ट में आरोपी यह साबित करने में असफल रहा कि शिकायतकर्ता महिला वास्तविक नहीं, बल्कि कोई अन्य महिला थी। पर्याप्त दस्तावेजी साक्ष्य के अभाव में कोर्ट ने शिकायतकर्ता की पहचान को स्वीकार कर लिया। 23 मार्च 2006 को जिला कोर्ट ने आरोपी जीता उर्फ बिट्टू को रेप, अपहरण और बंधक बनाकर रखने की धाराओं के तहत 6 साल की कठोर सजा और 22 हजार रुपए जुर्माना सुनाया। हालांकि कुछ समय बाद वह जमानत मिलने पर जेल से बाहर आ गया और मामला हाईकोर्ट पहुंचा। हाईकोर्ट में आरोपी की 6 मुख्य दलीलें हाईकोर्ट से ऐसे बरी हुआ व्यक्ति
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