प्राथमिक शिक्षा विभाग का रेवेन्यू बोर्ड में वकील न होने के कारण राजस्व मंडल में चलने वाले दो स्कूलों के मामले कई वर्षों से लंबित पड़े हैं, इनमें से ही एक राजकीय बरसो के नगला के विद्यार्थी इसका खामियाजा भुगत रहे हैं।
2 जुलाई 2010 में स्कूल के भवन व खेल मैदान के लिए उपखंड अधिकारी ने 7 बीघा भूमि आवंटित की, लेकिन इस भूमि पर कुछ लोगों द्वारा रेवेन्यू बोर्ड में ईंधन, गोबर के उपले सुखाने का हवाला देते हुए कब्जा कर लिया। रेवन्यू बोर्ड में स्टे लगवा दिया। वर्तमान में स्कूल की आवंटित भूमि पर राजस्व मंडल में जौहरी बनाम सरकार मामला चल रहा है, जिसकी पैरवी करने के लिए शिक्षा विभाग में वकील न होने के कारण आज तक मामला लंबित है। यही वजह है कि स्कूल की आवंटित भूमि पर लोगों के गोबर, उपले सूख रहे हैं और स्कूल के 65 बच्चे एक किराए के कमरे में जमीन पर बैठकर पढ़ाई करते हैं। पार्षद के घर किराए के कमरे में चल रहा स्कूल स्कूल के प्रधानाचार्य योगेंद्र सिंह बताते हैं कि वर्तमान में स्कूल पार्षद गोविंद के घर पर 2 कमरों के कमरों में चल रहा है। एक कमरे में कार्यालय बना रखा है और दूसरे कमरे में सभी बच्चों को बैठाकर एक ही छत के नीचे पढ़ाया जाता है। कमरे के बाहर टिनशेड के नीचे मीड-डे-मील बनाया जाता है। वकील की नियुक्ति नहीं होने से मामला अटका प्रधानाचार्य ने बताया विभागीय स्तर पर वकील की नियुक्ति नहीं होने से मामला आगे नहीं बढ़ सका। इस दौरान भूमि का उपयोग विद्यालय के बजाय अन्य कार्यों में हो रहा है। उधर किराए के एक कमरे में एक साथ कई कक्षाओं का संचालन किया जा रहा है। बैठने की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने से बच्चों को फर्श पर बैठना पड़ता है। गर्मी के दिनों में कमरे में उमस बढ़ने से पढ़ाई प्रभावित होती है। इसी के कारण नामांकन भी नहीं बढ़ रहा। स्कूल बनने के लिए आई थी ईंट और चंबल रेता, स्टे लगते ही चुरा कर ले गए लोग स्कूल प्रधानाचार्य योगेंद्र बताते हैं कि स्कूल की बाउंड्री वॉल व अन्य के लिए सरकार की तरफ से ग्रांट मिली। 4 ट्रक पत्थर, 1 ट्रॉली बजरी, 2000 ईंट, जीरो गिट्टी मंगवाई गई थीं, लेकिन स्टे लगने के कारण स्कूल केवल बाउंड्री वॉल ही बनाई गई थी लेकिन स्टे लग जाने के कारण आसपास के लोग यहां रखी निर्माण सामग्री को ही चुराकर ले गए। “राजस्व मंडल में वकील न होने के कारण मामले अभी लंबित हैं।”
-अतुल चतुर्वेदी, डीईओ, एलिमेंट्री
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