बैतूल में माचना नदी पर 300 करोड़ रुपए की लागत से प्रस्तावित शीतलझिरी बांध परियोजना की भू-अर्जन प्रक्रिया में फर्जीवाड़े का आरोप लगा है। परियोजना के लिए गठित विषय विशेषज्ञ समिति के दो सदस्यों (ग्राम पंचायत सेहरा के सरपंच और उपसरपंच) ने पुलिस अधीक्षक (एसपी) से शिकायत कर समिति के प्रस्ताव पर उनके फर्जी हस्ताक्षर कर निर्णय पारित करने का आरोप लगाया है। वर्तमान में एसपी और सिंचाई विभाग के कार्यपालन यंत्री (ईई) ने इस मामले की गहन जांच का आश्वासन दिया है, वहीं प्रभावित होने वाले आदिवासी परिवारों का बांध के खिलाफ विरोध जारी है। सदस्यों का आरोप- बिना जानकारी पारित किया प्रस्ताव एसपी को सौंपे गए दस्तावेजों में एक शिकायत पत्र और ग्राम पंचायत सेहरा के सरपंच व उपसरपंच के बयान शामिल हैं। दोनों सदस्यों ने अपने बयानों में कहा है कि उन्हें समिति में शामिल तो किया गया, लेकिन किसी भी बैठक या निर्णय की सूचना नहीं दी गई। उनकी जानकारी के बिना ही समिति के नाम से प्रस्ताव पारित कर दिया गया और उस पर उनके हस्ताक्षर भी दर्शा दिए गए, जो उन्होंने नहीं किए थे। गौरतलब है कि इस समिति का मुख्य कार्य यह सुनिश्चित करना है कि परियोजना से कोई विस्थापन न हो, प्रभावितों को उचित मुआवजा मिले और पर्यावरण तथा वन्यजीवों के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध रहें। 1200 एकड़ जमीन डूबने और 35 मकान विस्थापित होने का खतरा सेहरा के पास माचना नदी पर प्रस्तावित इस बांध का ग्रामीण लगातार विरोध कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि परियोजना से करीब 500 आदिवासी परिवारों की 1200 एकड़ जमीन डूब क्षेत्र में आ जाएगी और 35 परिवारों के मकान विस्थापित होंगे। ग्रामीणों के आंदोलन का नेतृत्व कर रहे आदिवासी नेता हेमंत सरेआम ने आरोप लगाया है कि प्रशासन ने समिति में ऐसे लोगों को शामिल कर लिया है जो सत्ता पक्ष से जुड़े हैं और जिनका स्थानीय ग्रामीणों से कोई वास्तविक संबंध नहीं है। उनका कहना है कि प्रशासन किसी भी तरह प्रस्ताव को पारित कराना चाहता है, इसलिए पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं बरती जा रही है। EE और SP बोले- मामले की होगी गहन जांच सिंचाई विभाग के कार्यपालन यंत्री (ईई) ने इस मामले पर कहा कि पूरी प्रक्रिया सिंचाई एसडीओ द्वारा करवाई गई थी और यह मामला हाल ही में उनके संज्ञान में आया है। उन्होंने जांच का आश्वासन देते हुए कहा कि हस्ताक्षरों की जांच विशेषज्ञों से कराई जाएगी ताकि उनकी प्रामाणिकता स्पष्ट हो सके। ईई ने यह आशंका भी व्यक्त की है कि संभव है कि समिति के सदस्यों ने पहले हस्ताक्षर किए हों और अब किसी दबाव में इससे इनकार कर रहे हों। वहीं, एसपी वीरेंद्र जैन ने भी इस शिकायत की गहन जांच का आश्वासन दिया है।
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