स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के बाद जारी फाइनल वोटर लिस्ट ने ने सीएम योगी की आशंका को सच साबित कर दिया। यूपी में सपा की तुलना में भाजपा और उसके सहयोगी दलों की सीटों पर वोटर ज्यादा कम हुए हैं। यह ट्रेंड शहरी और ग्रामीण दोनों विधानसभा सीटों पर एक जैसा है। योगी ने प्रदेश भाजपा संगठन, सरकार और संघ की समन्वय बैठकों में इसकी आशंका जताई थी। उन्होंने कहा था कि SIR को लेकर कार्यकर्ताओं को उदासीनता तोड़नी होगी। अगर अभी बूथ लेवल की इस लड़ाई को नहीं जीत पाए, तो विधानसभा चुनाव में हमारी तैयारी अधूरी रह जाएगी। अब सवाल है कि क्या भाजपा को नए सिरे से अपनी रणनीति बुननी पड़ेगी? सीएम योगी, कुंडा विधायक राजा भैया, डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक समेत तमाम हाईप्रोफाइल सीटों पर कितना बदलाव हुआ? पढ़िए ये रिपोर्ट… पहले यूपी की 403 सीटों पर SIR का असर जानिए यूपी की 403 सीटों में मौजूदा वक्त में भाजपा 257, सपा 102, अपना दल 13, रालोद 9, सुभासपा 6, निषाद पार्टी 5, जनसत्ता दल लोकतांत्रिक व कांग्रेस 2-2, बसपा 1 सीट पर काबिज हैं। SIR के बाद यूपी में 2.04 करोड़ वोटर घटे हैं। यानी हर सीट पर औसतन 13.24% वोटर कम हुए हैं। लेकिन हम जैसे ही आंकड़ों पर नजर दौड़ाते हैं, अंतर साफ नजर आता है। सपा की तुलना में भाजपा की सीटों पर ज्यादा वोट कटे हैं। यूपी में 102 शहरी सीटें हैं। इनमें सपा को 2022 में 19 पर जीत मिली थी। इन सीटों पर 26 हजार से 1.07 लाख तक वोटर कम हुए हैं। वहीं, NDA की 83 सीटों पर 26 हजार से लेकर 3.16 लाख तक वोटर्स कम हुए हैं। इसी तरह ग्रामीण इलाकों की 301 सीटों में सपा ने 92 सीटों पर जीत दर्ज की थी। इन सीटों पर 16 हजार से लेकर 79 हजार तक वोट कम हो गए हैं। वहीं, भाजपा की 176 सीटों पर 15 हजार से लेकर 1.42 लाख तक वोटर्स कम हुए हैं। अपना दल की 11 सीटों पर 27 से 72 हजार तक, सुभासपा की 5 सीटों पर 28 से 50 हजार तक, निषाद की 6 सीटों पर 30 से 59 हजार तक, रालोद की 7 सीटों पर 27 से 48 हजार तक वोट कम हुए हैं। सीनियर जर्नलिस्ट हेमंत तिवारी कहते हैं- आप पिछले दो चुनावों को देखें। 2017 के चुनाव की तुलना में 2022 के चुनाव में हार-जीत का मार्जिन काफी कम रहा था। यही वजह रही कि भाजपा ने 60 से ज्यादा सीटें 10 हजार से भी कम अंतर से जीती थीं। अब जानिए हाई प्रोफाइल सीटों पर क्या बदला… सीएम योगी की सीट पर सबसे कम वोट कटे
प्रदेश की 102 शहरी सीटों में से अमरोहा में सबसे कम 26 हजार 223 (8.32%) वोटर कम हुए हैं। ये संख्या के हिसाब से सबसे कम है। 2022 में ये सीट सपा के महबूब अली ने 71 हजार के मार्जिन से जीती थी। वहीं, प्रतिशत के हिसाब से सीएम योगी की गोरखपुर शहर सीट पर सबसे कम वोट घटे हैं। यहां सिर्फ 6.88% वोट घटे हैं। वोटर संख्या के हिसाब से ये 33 हजार 94 बैठती है, जबकि योगी ने ये सीट 1.03 हजार वोटों से जीती थी। महाना की सीट पर जीत के मार्जिन से 8 हजार ज्यादा वोट कटे
ग्रामीण इलाकों की 301 सीटों पर औसतन 42 हजार मतदाता घटे हैं। हालांकि, यहां भी सपा की तुलना में भाजपा को ज्यादा नुकसान हुआ है। लखनऊ की सरोजनीनगर सीट पर सबसे ज्यादा 1.42 लाख मतदाता कम हुए हैं। इस सीट से भाजपा के राजेेश्वर सिंह विधायक हैं। पिछली बार वे 56 हजार वोट से जीते थे। सबसे ज्यादा संख्या में वोट कटने वाली टॉप-10 ग्रामीण सीटों में महराजपुर भी है। विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना यहां से विधायक हैं। यहां 90 हजार वोट कटे हैं, जबकि महाना करीब 82 हजार वोट से जीते थे। इसी तरह छिबरामऊ से भाजपा की अर्चना पांडे, आगरा ग्रामीण से बेबी रानी मौर्य विधायक हैं। यहां भी जीत-हार के अंतर से ज्यादा वोट कटे हैं। राजा भैया और माताप्रसाद की सीट पर भी हाल यही जनसत्ता दल लोकतांत्रिक के राष्ट्रीय अध्यक्ष रघुराज प्रताप सिंह ‘राजा भैया’ की कुंडा सीट पर 55 हजार से ज्यादा वोट घटे हैं। 2022 में उन्होंने ये सीट 30 हजार के मार्जिन से जीती थी। भाजपा की अदिति सिंह की रायबरेली सदर सीट पर 56 हजार से ज्यादा मतदाता घटे हैं। जबकि 2022 में वे सिर्फ 7 हजार के अंतर से जीती थीं। सुभासपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर की जहूराबाद सीट की बात करें तो यहां 39 हजार से ज्यादा वोटर्स घटे हैं। लेकिन, उन्होंने ये सीट 45 हजार के अंतर से जीती थी। खास बात यह है कि तब वे सपा के साथ गठबंधन में थे। वहीं, सपा विधायक रागिनी सोनकर की मछलीशहर सीट पर 42 हजार से ज्यादा वोट घटे हैं, जबकि जीत 8 हजार से कुछ ज्यादा मार्जिन से हुई थी। इसी तरह विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय 1662 वोट से जीते थे। SIR के बाद करीब 41 हजार मतदाता घटे हैं। कांग्रेस विधायक दल की नेता आराधना मिश्रा की सीट रामपुर खास पर 39 हजार से ज्यादा वोट कटे हैं। पिछली बार उन्होंने यह सीट 14 हजार वोट से जीती थी। अब टॉप-5 शहरी और ग्रामीण सीटों पर असर जानिए… शहर में साहिबाबाद पर सबसे ज्यादा वोट कटे
सबसे ज्यादा संख्या में वोट कटने वाली टॉप-10 शहरी सीटों पर भाजपा का कब्जा है। इसमें सबसे ज्यादा साहिबाबाद पर करीब 3.16 लाख वोट घटे हैं। सुनील शर्मा ने ये सीट 2.12 लाख वोट से जीती थी। अब 3.16 लाख मतदाता घट गए हैं। लखनऊ नॉर्थ से नीरज बोरा ने ये सीट 33 हजार से ज्यादा वोटों से जीती थी। SIR के बाद 1.54 लाख वोटर्स कम हो चुके हैं। डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक की सीट लखनऊ कैंट पर 1.24 वोटर्स घटे हैं, जबकि पिछली बार जीत का मार्जिन करीब 39 हजार ही था। 7 अन्य सीटों पर भी मार्जिन की तुलना में ज्यादा वोट घटे हैं। ऐसे में 2027 में इन सीटों पर जीत-हार का समीकरण बदल सकता है। ग्रामीण सीटों में बरखेड़ा में सबसे कम वोट घटे
ग्रामीण इलाके की बरखेड़ा सीट पर संख्या के लिहाज से सबसे कम वोट कटे हैं। भाजपा के जयद्रथ यहां से विधायक हैं। 2022 में वे 81 हजार वोट से जीते थे, जबकि यहां सिर्फ 15 हजार वोट ही कम हुए हैं। इसी तरह तिंदवारी से भाजपा के राकमेश निषाद विधायक हैं। यहां करीब 16 हजार वोटर्स घटे हैं। उन्होंने सीट 28 हजार वोट से जीती थी। कुंदरकी सीट पर 19 हजार मतदाता घटे हैं। 2022 में यह सीट सपा ने जियाउर रहमान ने 43 हजार वोटों से जीती थी। उनके सांसद चुने जाने के बाद हुए उपचुनाव में यह सीट भाजपा के रामवीर सिंह ने 1.74 लाख वोटों से जीती थी। इस सीट पर 60 प्रतिशत आबादी मुस्लिम है। ————————- ये खबर भी पढ़ें… मंत्री खन्ना और बसपा की इकलौती सीट खतरे में?, SIR के बाद 114 सीटें फंसीं, भाजपा-सपा का गणित बिगड़ा 2022 के विधानसभा चुनाव में 114 सीटें ऐसी थीं, जहां जीत-हार का अंतर 10 हजार से कम था। SIR के बाद इन सीटों पर 16 हजार से 1.18 लाख तक वोटर कम हो गए हैं। ऐसे में ये सीटें डेंजर जोन में आ गई हैं। पूरी खबर पढ़ें…
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