हरदा में ग्रीष्मकालीन मूंग की सिंचाई के लिए पानी की किल्लत के बीच माचक उपनहर से पानी चोरी का मामला सामने आया है। जिले के किसानों के लिए 27 मार्च से पानी छोड़े जाने के बाद से यह समस्या शुरू हुई है। असामाजिक तत्वों ने पिछले करीब 12 दिनों में पांच स्थानों पर तीन बार नहर में छेद कर पानी चुराया है। इससे कमांड क्षेत्र के किसान परेशान हैं और आंदोलन की चेतावनी दे रहे हैं। सिंचाई विभाग, पुलिस और राजस्व विभाग की ओर से नहरों की निगरानी के बावजूद पानी की चोरी नहीं रुक रही है। असामाजिक तत्व डक्ट के ऊपर होल कर नालों के जरिए खेतों तक पानी ले जा रहे हैं। यह तोड़फोड़ एलान के बाहर माचक उपनहर में की गई है। जानकारी के अनुसार, करीब 10 इंच मोटी नहर की सीसी परत को बिना ड्रिल मशीन के तोड़ना मुश्किल है। माचक उपनहर को ग्राम बावड़िया नाला, ग्राम बावड़िया, घोघई नदी ग्राम मालापुर और साकिया नाला मालापुर के पास क्षतिग्रस्त किया गया है। सिंचाई विभाग ने इन सभी स्थानों की मरम्मत करा दी है। सिंचाई विभाग की कार्यपालन यंत्री सोनम बाजपेई ने बताया कि माचक उपनहर से 4 हजार हेक्टेयर में सिंचाई का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। उन्होंने पुष्टि की कि असामाजिक तत्वों ने तीन बार पांच स्थानों पर नहर फोड़कर पानी ले जाने का प्रयास किया, जिसकी अगले ही दिन मरम्मत कर दी गई। विभाग ने नहर में तोड़फोड़ करने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की चेतावनी दी है। पानी की चोरी रोकने के लिए नहर विभाग ने पहली बार सोलर पैनल से संचालित सीसीटीवी कैमरे लगाए हैं। ये कैमरे इंडिया ब्रांच कैनाल (एचबीसी) की तीन माइनर – गुरदिया, झाड़पा, खोड़ियाखेड़ी – और लेफ्ट ब्रांच कैनाल (एलबीसी) पर माचक डिस्ट्रीब्यूटर पर लगाए गए हैं। इन कैमरों पर लगभग 36 हजार रुपए खर्च किए गए हैं। इसके अतिरिक्त, नहरों में पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए पुलिस जवानों को भी तैनात किया गया है। सिंचाई विभाग से मिली जानकारी के अनुसार डिमांड से कम पानी मिल रहा है। इसके कारण किसानों को परेशान होना पड़ रहा है। मुख्य माइनर 3008 पर 2053 क्यूसेक पानी मिलना चाहिए। इसके बजाए 1676 क्यूसेक पानी मिल रहा है। इसी वजह से विभाग ओसराबंदी लागू कर रहा है। मूंग के लिए जिले के 167 गांवों की 38460 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई के लिए पानी का ऐलान है। इसमें हरदा डिविजन के 111 और टिमरनी डिवीजन के 56 गांव शामिल हैं। हरदा संभाग में एलबीसी से 19135 हेक्टेयर और टिमरनी संभाग में एचबीसी से 19325 हेक्टेयर क्षेत्र में मूंग फसल की सिंचाई के लिए पानी मिलेगा।
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