हरदा में अध्यापक संयुक्त मोर्चा के बैनर तले बुधवार को शिक्षकों ने टीईटी (शिक्षक पात्रता परीक्षा) की अनिवार्यता के विरोध में प्रदर्शन किया। शिक्षकों ने पंच पिपलेश्वर महादेव मंदिर से कलेक्ट्रेट तक रैली निकालकर नायब तहसीलदार भगवान दास तमखाने को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में शिक्षकों ने टीईटी अनिवार्यता को समाप्त करने और सेवा अवधि की गणना प्रथम नियुक्ति तिथि से करने की मांग की है। उनका कहना है कि हालिया निर्देशों से प्रदेश के करीब डेढ़ लाख शिक्षक प्रभावित हो रहे हैं। ■ सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बढ़ा विवाद शिक्षकों के अनुसार, सर्वोच्च न्यायालय के एक फैसले के बाद 2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों के लिए भी टीईटी पास करना अनिवार्य कर दिया गया है, जिसके चलते प्रदेशभर में विरोध हो रहा है। ■ NCTE अधिसूचना का दिया हवाला जिलाध्यक्ष रामनिवास जाट ने बताया कि एनसीटीई की 10 अगस्त 2010 की अधिसूचना में कई श्रेणियों के शिक्षकों को टीईटी से छूट दी गई थी, जिसमें 2001 से पहले और बाद में नियुक्त शिक्षक शामिल हैं। ■ निर्देशों को बताया नियमों के विपरीत मोर्चा का कहना है कि विभागीय आयुक्तों द्वारा नॉन-टीईटी शिक्षकों को परीक्षा के लिए बाध्य करना अधिसूचना और न्यायालय के निर्णय के विपरीत है। उन्होंने 2 मार्च और 26 मार्च 2026 को जारी आदेशों को निरस्त करने की मांग की। ■ वैधानिक लाभों से जुड़ा मुद्दा शिक्षकों ने सेवा अवधि की गणना प्रथम नियुक्ति तिथि से करने की मांग की, ताकि उन्हें पेंशन, ग्रेच्युटी और अवकाश नगदीकरण जैसे लाभ मिल सकें। ■ पूर्व मंत्री से भी की मुलाकात रैली में शामिल करीब 300 शिक्षकों ने पूर्व कृषि मंत्री कमल पटेल से मुलाकात कर टीईटी अनिवार्यता समाप्त करने की मांग दोहराई।
Source link