20 साल से जेल में बंद, याचिका पर मांगा जवाब:कोर्ट ने कहा- पूर्व रिहाई पर विचार किए बगैर अनिश्चित काल बंद नहीं रख सकते




इलाहाबाद हाईकोर्ट ने केंद्रीय कारागार वाराणसी में 20 साल से उम्रकैद की सजा भुगत रहे सिद्ध दोष कैदी बैजू पुत्र गंगा कोहार निवासी थाना पुरंदरपुर जिला महाराजगंज की समय पूर्व रिहाई की याचिका पर राज्य सरकार से दो हफ्ते में जवाब मांगा है और याचिका 17 अप्रैल को सुनवाई के लिए पेश करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने आदेश की प्रति अपर मुख्य सचिव गृह लखनऊ, प्रमुख सचिव कारागार एवं रिफार्म सेवाएं लखनऊ,व डायरेक्टर जनरल कारागार लखनऊ,को सी जे एम लखनऊ,जेल अधीक्षक वाराणसी को सी जे एम वाराणसी,व डी एम महाराजगंज को सी जे एम महाराजगंज के मार्फत 48 घंटे में भेजने का आदेश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति जे जे मुनीर तथा न्यायमूर्ति तरूण सक्सेना की खंडपीठ ने कैदी बैजू की याचिका की सुनवाई करते हुए दिया है। रिहाई के लिए हुआ आवेदन याची के अधिवक्ता का कहना है कि शासन में स्थाई नीति के तहत समय पूर्व रिहाई के लिए अर्जी वरिष्ठ अधीक्षक केंद्रीय कारागार वाराणसी के के समक्ष 22 सितंबर 2025 से विचाराधीन है। थाना पुरंदरपुर में धारा 304 बी 498 ए आईपीसी व 3/4 दहेज प्रतिषेध अधिनियम में एफआईआर दर्ज हुई । 21 नवंबर 2013 को एडिशनल सेशन जज कोर्ट महाराजगंज के द्वारा आजीवन कारावास एवं 20000 के अर्थ दंड से दंडित किया गया। इसके खिलाफ अपील इलाहाबाद हाईकोर्ट ने खारिज करते हुए सजा की पुष्टि कर दी। याची अधिवक्ता ने सुप्रीम कोर्ट के लक्ष्मण नाकुर केस का हवाला दिया। जिसमें कहा गया है कि समय पूर्व रिहाई की अर्जी पर विचार किए बगैर किसी उम्रकैद की सजा काट रहे कैदी को अंतहीन कारागार में बंद नहीं रखा जा सकता। नियमानुसार विचार किया जाना चाहिए।



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