21 साल पुराने चावल घोटाले में 11 लोगों को सजा:सीबीआई अदालत का फैसला, दोषियों में FCI अधिकारी और मिल मालिक भी शामिल




सीबीआई की विशेष अदालत ने 21 साल पुराने (2004-05) चावल घोटाले से जुड़े मामले में अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने एफसीआई अधिकारियों और मिल मालिकों की मिलीभगत से सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और भ्रष्टाचार का दोष सिद्ध माना है। अदालत ने एफसीआई के सीनियर रीजनल मैनेजर स्तर से लेकर टेक्निकल असिस्टेंट तक व दो राइस मिलर्स समेत 11 लोगों को सजा सुनाई। जबकि पांच लोगों को बरी किया गया। इन लोगों को आईपीसी की धारा 120-B में 1 साल सश्रम कारावास और 5,000 रुपये जुर्माना, धारा 420 में 3 वर्ष सश्रम कारावास और 15,000 रुपये जुर्माना, और भ्रष्टाचार अधिनियम (Corruption Act) में तीन साल की सजा और 10,000 रुपये जुर्माना सुनाई गई। इस केस में सीबीआई के वकील अनमोल नारंग थे, जिन्होंने मजबूती से पक्ष रखा। सजा पाए लोग: एफसीआई अधिकारी पद: राज कुमार, तत्कालीन टेक्निकल असिस्टेंट, मोगा सेंटर आरसी पुरी, तत्कालीन टेक्निकल असिस्टेंट गुलाब सिंह, तत्कालीन टेक्निकल असिस्टेंट पितांबर सिंह, तत्कालीन टेक्निकल असिस्टेंट जीपीएस कलरा, तत्कालीन टेक्निकल असिस्टेंट ज्ञान सिंह, तत्कालीन एएम (QC) डीके शर्मा, तत्कालीन एएम (QC) आजाद सिंह, तत्कालीन डिप्टी मैनेजर (QC), फरीदकोट राजेश रंजन, तत्कालीन डिस्ट्रिक्ट मैनेजर, फरीदकोट मिल मालिक/पार्टनर: गोविंदर सिंह, पार्टनर, M/s पंजाब राइस एंड जनरल मिल्स, मोगा परदीप बंसल, पार्टनर, M/s आरपी एग्रो इंडस्ट्रीज बरी किए गए लोग: गुरचरन सिंह, टेक्निकल असिस्टेंट संतोख सिंह, एएम (QC) कमला अग्रवाल, पार्टनर, KCBL Co. सुमीत गर्ग विनीत कुमार, डायरेक्टर, M/s मोगा फूड्स प्राइवेट लिमिटेड कुछ आरोपियों (के. शिवा प्रसाद – तत्कालीन SRM, बरजिंदर सिंह, पवन कुमार आदि) के खिलाफ कार्यवाही पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट द्वारा खारिज कर दी गई। कुछ आरोपियों की मृत्यु के कारण कार्यवाही समाप्त कर दी गई। चावल के सैंपल मानव उपयोग के लिए अनफिट पाए गए:
फरीदकोट जिले के मोगा डिपो से संबंधित यह केस है। 29 सितंबर 2005 को सीबीआई टीम, एफसीआई पंजाब के तकनीकी स्टाफ और स्वतंत्र गवाहों के साथ मोगा डिपो के गोदामों पर जॉइंट सरप्राइज चेक किया गया। 46 सैंपल अलग-अलग स्टैक्स से लिए गए, जो विभिन्न मिलर्स द्वारा सप्लाई किए गए चावल के थे। सैंपलों का विश्लेषण सेंट्रल ग्रेन एनालिसिस लेबोरेटरी (CGAL), मिनिस्ट्री ऑफ कंज्यूमर अफेयर्स में किया गया। रिपोर्ट में पाया गया कि कोई भी सैंपल एफसीआई/सरकार की गाइडलाइंस के स्पेसिफिकेशंस में नहीं था। 9 स्टैक्स के सैंपल मानव उपभोग के लिए अनफिट (PFA लिमिट्स से बाहर) पाए गए।



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