5 लाख PNG कनेक्शन का टारगेट, 5 चुनौतियां:इंफ्रास्ट्रक्चर डवलप नहीं, लोगों में झिझक, जानिए सरकार का प्लान, आप कैसे ले सकते हैं लाभ




राजस्थान के सरकारी बंगलों और क्वार्टर की रसोई में अब लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) की बजाय पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) इस्तेमाल की जाएगी। सभी सर्किट हाउस, हॉस्टल, मिड-डे मील बनाने वाले सरकारी स्कूल, पुलिस मेस-जेल और सभी अन्नपूर्णा किचन में भी PNG कनेक्शन लेना होगा। अमेरिका-इजराइल और ईरान युद्ध के कारण LPG संकट को देखते हुए राज्य सरकार ने ये फैसला किया है। जिन क्षेत्रों में पाइपलाइन की उपलब्धता है, वहां आम उपभोक्ताओं को भी PNG से जोड़ने की तैयारी की जा रही है। अगले तीन महीनों में 5 लाख कनेक्शन का लक्ष्य रखा गया है। भास्कर ने जिम्मेदार अधिकारियों और एक्सपट्‌र्स से बात कर जानने की कोशिश की कि 5 लाख कनेक्शन का टारगेट (लक्ष्य) पूरा करने के लिए क्या तैयारिया हैं। साथ ही चुनौतियों पर भी बात हुई। पढ़िए पूरी रिपोर्ट… ये चुनौतियां हैं… राज्य सरकार की तैयारियां… जयपुर में 16 हजार से ज्यादा कनेक्शन
जयपुर में PNG उपलब्ध कराने वाली टोरेंट गैस कंपनी के प्रतिनिधि शोभित ने बताया- जयपुर के महिंद्रा सेज, जयसिंहपुरा, कालवाड़ रोड, सिरसी रोड, पांच्यावाला और गांधी पथ (पश्चिम) जैसे क्षेत्रों में 16 हजार से अधिक पीएनजी कनेक्शन चालू कर दिए हैं। इसके अलावा बनी पार्क, झोटवाड़ा और वैशाली नगर जैसे नए क्षेत्रों को पाइपलाइन से जोड़ने की प्रक्रिया चल रही है। रोज 50 नए कनेक्शन हो रहे हैं। अगले तीन महीनों में जयपुर शहर के 8 हजार घरों में पीएनजी कनेक्शन का टारगेट है। ग्राहकों की मांग के आधार पर इस गति को और बढ़ाया जा सकता है। सरकारी क्वार्टर और स्कूलों के लिए संबंधित विभागों और सरकारी एजेंसियों से संपर्क किया जा रहा है। इन क्षेत्रों में पाइपलाइन बिछाने के लिए नेटवर्क को प्राथमिकता दी जा रही है। जयपुर जिला रसद अधिकारी प्रियव्रत सिंह चारण ने बताया- जहां पाइपलाइन मौजूद है, वहां प्राथमिकता से काम करने के निर्देश दिए गए हैं। ऐसे एरिया को चिन्हित करने के निर्देश दिए जहां एलपीजी का बल्क कंजप्शन होता है, ताकि ज्यादा से ज्यादा कस्टमर को पीएनजी पर शिफ्ट किया जा सके। पाइपलाइन बिछाने के लिए जरूरी अनुमति 24 घंटे में प्रदान की जा रही है। एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर्स फेडरेशन ऑफ राजस्थान के दीपक गहलोत ने बताया कि अभी कई जगहों तक पाइप लाइन पहुंची नहीं हैं। इसमें कई व्यावहारिक दिक्कतें भी हैं। घरों में रसोई तक पाइप लाइन पहुंचाना भी थोड़ा मुश्किल है। RSGL के तत्कालीन प्रबंध निदेशक रणवीर सिंह ने बताया कि सरकार से अभी जो हमें पुश मिला है, इसके जरिए हम ज्यादा से ज्यादा काम तेजी से करने की कोशिश कर रहे हैं। अपने नेटवर्क को बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। 22 जिलों में PNG किसी ना किसी क्षेत्र में उपलब्ध है। अगले तीन महीनों में पांच लाख कनेक्शन देने का लक्ष्य है। फिलहाल हम राजस्थान में 450 कनेक्शन रोजाना दे पा रहे हैं। अब समझिए कैसे ले सकते हैं PNG कनेक्शन, कितना आएगा खर्च सवाल : क्या अब राजस्थान में PNG कनेक्शन लेना अनिवार्य हो गया है? जवाब : हां, नए नियमों के तहत जिन इलाकों में PNG पाइपलाइन पहुंच चुकी है, वहां रहने वाले लोगों के लिए यह लगभग अनिवार्य कर दिया गया है। ‘प्राकृतिक गैस एवं पेट्रोलियम उत्पाद वितरण आदेश 2026’ के अनुसार, अगर किसी उपभोक्ता के घर तक PNG की सुविधा उपलब्ध है और वह कनेक्शन नहीं लेता है, तो नोटिस मिलने के 90 दिन बाद उसकी LPG सिलेंडर की सप्लाई बंद की जा सकती है। यह नियम इसलिए लाया गया है ताकि गैस पाइपलाइन नेटवर्क का बेहतर उपयोग हो और जिन इलाकों में PNG नहीं पहुंची है, वहां LPG की सप्लाई सुचारू बनी रहे। सवाल : मेरी कॉलोनी में पाइपलाइन आ चुकी है, लेकिन अभी तक गली में नहीं है, तो ऐसे में मुझे नोटिस मिलेगा या नहीं, नोटिस के दायरे में कौन-कौन आएंगे? जवाब : कॉलोनी में मेन पाइपलाइन आ गई, लेकिन अभी आपकी गली तक लाइन नहीं पहुंची है, तो आपको तुरंत व्यक्तिगत नोटिस नहीं मिलेगा। नोटिस तब जारी किया जाएगा, जब गैस कंपनी आपकी गली या पूरे आवासीय क्षेत्र में पाइपलाइन बिछाने के लिए अनुमति प्रक्रिया शुरू कर चुकी है। उस समय सूचना केवल किसी एक घर को नहीं, बल्कि पूरी कॉलोनी, सभी घरों/फ्लैट्स और संबंधित सोसाइटी को दी जाती है, क्योंकि नियम पूरे क्षेत्र को एक यूनिट मानकर लागू होते हैं। अगर इस प्रक्रिया में निवासी सहयोग नहीं करते या पाइपलाइन बिछाने की अनुमति नहीं देते, तो कंपनी सार्वजनिक नोटिस जारी कर सकती है। इसके बाद भी अगर स्थिति नहीं बदलती, तो नोटिस के तीन महीने के भीतर उस पूरे एरिया में LPG सप्लाई बंद की जा सकती है, ताकि लोगों को पाइप्ड गैस सिस्टम से जोड़ा जा सके। सवाल : PNG कनेक्शन लेने की प्रक्रिया क्या है? जवाब : इसे ऑनलाइन या ऑफलाइन, दोनों तरीकों से लिया जा सकता है। सबसे पहले आपको अपने इलाके में काम करने वाली गैस कंपनी की वेबसाइट पर जाना होगा और ‘New PNG Connection’ के विकल्प पर क्लिक करना होगा। इसके बाद अपना नाम, पता और अन्य जरूरी जानकारी भरनी होती है। फिर जरूरी दस्तावेज अपलोड कर फीस का भुगतान करना होता है। आवेदन सब्मिट करने के बाद एक रेफरेंस नंबर मिलता है, जिससे आप अपने आवेदन का स्टेटस ट्रैक कर सकते हैं। आमतौर पर 15 से 30 दिन के भीतर कनेक्शन इंस्टॉल कर दिया जाता है। सवाल : PNG कनेक्शन की पूरी प्रोसेस, इसमें होने वाला खर्चा एक उदाहरण से समझाइए? जवाब : उपभोक्ता को सबसे पहले यह पता करना है कि आपके शहर में कौनसी कंपनी सेवा दे रही है। दूसरा-आपके क्षेत्र/कॉलोनी में उस कंपनी के पीएनजी कनेक्शन की सुविधा उपलब्ध है या नहीं। जयपुर में Torrent Gas भी सेवा दे रही है। आपके मोहल्ले या गली में पीएनजी कनेक्शन उपलब्ध है या नहीं, इसकी जानकारी कंपनी के मोबाइल ऐप या हेल्पलाइन नंबर से ले सकते हैं। अगर कंपनी कहती है- उपलब्धता है तो उसके बाद उपभोक्ता कनेक्शन के लिए ऑनलाइन या ऑफलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन में बेसिक जानकारी भरने के बाद कंपनी की तकनीकी टीम आपके घर का निरीक्षण करने आएगी। PNG कनेक्शन के लिए पहचान और पते से जुड़े दस्तावेज देना अनिवार्य है। इसके सत्यापन के बाद पाइपलाइन बिछाने और मीटर लगाने की तारीख तय की जाएगी। कनेक्शन का खर्च: एकमुश्त या EMI विकल्प PNG कनेक्शन के लिए उपभोक्ताओं को सिक्योरिटी डिपॉजिट और इंस्टॉलेशन चार्ज देना होता है। फुल पेमेंट स्कीम में करीब ₹7090 तक का खर्च आता है, जिसमें सिक्योरिटी और एप्लिकेशन फीस शामिल है। वहीं EMI स्कीम के तहत करीब ₹1090 देकर बाकी रकम किस्तों में चुकाई जा सकती है। सिक्योरिटी डिपॉजिट रिफंडेबल होता है, जबकि एप्लिकेशन फीस नॉन-रिफंडेबल रहती है। सवाल : एक उदाहरण से समझाइए, पीएनजी कनेक्शन LPG से सस्ता पड़ेगा या महंगा? जवाब : मान लीजिए एक परिवार महीने में एक घरेलू LPG सिलेंडर (14.2 किलो) इस्तेमाल करता है और उसकी कीमत लगभग ₹1000 है, तो परिवार का मासिक गैस खर्च करीब ₹1000 बैठता है। अब इसी गैस खपत को पीएनजी में बदलकर देखें तो तकनीकी गणना के अनुसार एक एलपीजी सिलेंडर के बराबर लगभग 16-17 SCM (स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर) पीएनजी लगती है। अगर किसी शहर में पीएनजी की औसत दर ₹50 प्रति SCM मानी जाए, तो 17 SCM गैस का बिल करीब ₹850 आएगा। यानी जहां एलपीजी पर ₹1000 खर्च हो रहे थे, वहीं पीएनजी पर लगभग ₹850 खर्च होंगे। इस तरह दोनों के बीच करीब ₹150 प्रति माह का अंतर रहता है, जो सालभर में लगभग ₹1800 की बचत बन जाता है। इसलिए नियमित सप्लाई वाले क्षेत्रों में पीएनजी एलपीजी के मुकाबले सस्ती पड़ती है, जबकि सुविधा और उपलब्धता के आधार पर कुछ जगहों पर एलपीजी अभी भी जरूरी विकल्प बनी हुई है। सवाल : आवेदन के कितने दिन बाद गैस की सप्लाई शुरू हो जाती है? जवाब : जयपुर की बात करें तो आवेदन के 15 से 30 दिन के भीतर गैस सप्लाई शुरू हो जाती है। अन्य शहरों में भी लगभग इतना ही समय मान लीजिए। यह समय केवल दस्तावेज के वेरिफिकेशन, साइट निरीक्षण और पाइपलाइन व मीटर इंस्टॉलेशन की प्रक्रिया पूरी होने में खर्च होता है। कनेक्शन लगने के बाद सप्लाई चालू कर दी जाती है। मासिक बिल ‘जितना इस्तेमाल, उतना भुगतान’ के आधार पर आता है। यह लंबे समय में किफायती साबित होता है। सवाल : घर बदलने पर क्या होगा? जवाब : अगर कोई उपभोक्ता अपने मौजूदा घर से दूसरे पते पर शिफ्ट होता है, तो वह PNG कनेक्शन को सीधे नए घर में ट्रांसफर नहीं कर सकता। उपभोक्ता को पहले पुराना कनेक्शन सरेंडर करना होगा। सभी बकाया बिल चुकाने होंगे। इसके बाद नए पते पर नया आवेदन करना होगा। कंपनियों ने साफ किया है कि उपभोक्ताओं को मीटर, पाइपलाइन या किसी इंस्टॉलेशन को खुद से हटाने, शिफ्ट करने या उसमें बदलाव करने की अनुमति नहीं है। ऐसा करना पूरी तरह प्रतिबंधित है और इससे हादसे का खतरा रहता है। ये नियम तब भी लागू रहेगा, जब किसी घर को तोड़ा जा रहा हो या कोई निर्माण कार्य पाइपलाइन को प्रभावित कर रहा हो। सवाल : प्रॉपर्टी बेचने पर क्या कनेक्शन ट्रांसफर हो सकता है? जवाब : अगर कोई व्यक्ति अपना घर बेचता है, तो PNG कनेक्शन नए मालिक के नाम ट्रांसफर किया जा सकता है। इसके लिए एडमिनिस्ट्रेटिव चार्ज देना होगा। जरूरी दस्तावेज जमा करने होंगे और कंपनी की स्वीकृति के बाद नाम बदला जाएगा। यानी प्रॉपर्टी के साथ कनेक्शन भी ट्रांसफर हो सकता है, लेकिन प्रक्रिया के जरिए। सवाल : मालिक की मृत्यु के बाद क्या नियम है? जवाब : अगर कनेक्शन धारक की मृत्यु हो जाती है, तो कनेक्शन कानूनी वारिस के नाम ट्रांसफर किया जा सकता है। इस स्थिति में कोई एडमिनिस्ट्रेटिव चार्ज नहीं लिया जाता, लेकिन वैध दस्तावेज देना अनिवार्य होता है। सवाल : अगर बिल नहीं भरा तो क्या होगा? जवाब : पहले रिमाइंडर/नोटिस मिलता है। फिर लेट फीस लगती है। लंबे समय तक भुगतान नहीं करने पर गैस सप्लाई अस्थायी रूप से बंद कर दी जाती है। दोबारा चालू कराने के लिए बकाया + चार्ज देना पड़ सकता है। सवाल : पीएनजी का चार्ज क्या है? जवाब : राजस्थान, खासकर जयपुर जैसे शहरों में घरेलू पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) के दाम 45 से 65 रुपए प्रति स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर (SCM) के बीच रहते हैं। हालांकि यह रेट समय-समय पर बदलता रहता है और अलग-अलग गैस कंपनियों के अनुसार कम-ज्यादा हो सकता है। PNG का बिल आपकी खपत के आधार पर बनता है।



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