अजमेर की कोतवाली थाना पुलिस ने बुजुर्गों और शारीरिक दर्द से परेशान लोगों को अपना निशाना बनाने वाले एक अंतरराज्यीय ठग गिरोह का पर्दाफाश किया है। यह गिरोह ‘प्राचीन यूनानी पद्धति’ से इलाज का झांसा देकर लोगों की गाढ़ी कमाई डकार रहा था।
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शनिवार को एसपी हर्षवर्धन अग्रवाला ने मामले का खुलासा करते हुए बताया कि पुलिस ने एक फर्जी डॉक्टर समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिन्होंने एक बुजुर्ग से घुटने का दर्द ठीक करने के नाम पर करीब 4.39 लाख रुपये ठग लिए थे।
तीनों आरोपियों से नगदी सहित अन्य सामान किया बरामद।
झांसे में लेकर ऐसे की ठगी
एसपी हर्षवर्धन अग्रवाला के अनुसार, पीड़ित हरीराम किशनचन्द मूलचन्दानी (62) ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि 26 मार्च को उन्हें एक व्यक्ति मिला, जिसने उनके घुटनों के दर्द को देखकर सहानुभूति जताई। ठग ने झांसा दिया कि उसकी मां को भी यही समस्या थी और ‘डॉ. समीर जरीवाला’ के इलाज से वह बिल्कुल ठीक हो गई।
ठगों ने योजनाबद्ध तरीके से बुजुर्ग को जाल में फंसाया। फर्जी डॉक्टर घर पहुँचा और घुटने से ‘सिंघी’ (एक कुप्पीनुमा उपकरण) के जरिए मवाद निकालने का नाटक किया। आरोपियों ने कुल 73 बार मवाद निकालने का दावा कर बुजुर्ग से 4 लाख 39 हजार रुपये वसूल लिए और फरार हो गए।
एसपी हर्षवर्धन अग्रवाल की ओर से मामले का किया गया खुलासा।
500 कैमरों ने खोला राज, भोपाल से हुई गिरफ्तारी
मामले की गंभीरता को देखते हुए एएसपी हिमांशु जांगिड़ और डिप्टी शिवम जोशी के निर्देशन में कोतवाली थानाधिकारी अनिल देव की विशेष टीम गठित की गई। टीम ने अभय कमांड सेंटर और निजी इमारतों में लगे 250 से अधिक सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली।
फुटेज के आधार पर गिरोह द्वारा इस्तेमाल की गई लाल रंग की स्विफ्ट कार को ट्रेस किया गया। तकनीकी सर्विलांस की मदद से पुलिस ने आरोपियों को मध्य प्रदेश के भोपाल से दस्तयाब कर गिरफ्तार कर लिया। तीनों आरोपी एक अन्य वारदात की फिराक में थे।
ये हुए गिरफ्तार
- दीन मोहम्मद (38): निवासी अंता, जिला बारां (यही व्यक्ति महिला की आवाज निकालकर बुजुर्ग से बात करता था)।
- मोहम्मद कादिर (28): निवासी अंता, जिला बारां (फर्जी डॉक्टर समीर जरीवाला बना था)।
- मोहम्मद आसिफ (35): निवासी विज्ञान नगर, जिला कोटा।
यह हुआ बरामद
पुलिस ने आरोपियों के पास से ठगी के 33,800 रुपये नकद, इलाज में प्रयुक्त उपकरण, दवाइयां, स्प्रे, 12 मोबाइल फोन (6 एंड्रॉइड व 6 की-पैड) और 9 सिम कार्ड जब्त किए हैं।
ऐस चुनते थे शिकार
गिरोह के सदस्य भीड़भाड़ वाले इलाकों में गाड़ियों पर रेडियम टेप लगाने के बहाने घूमते थे। इस दौरान वे ऐसे संपन्न बुजुर्गों की तलाश करते थे जो चलने में लाचार दिखें। पहचान होने पर गिरोह का एक सदस्य ‘मददगार’ बनकर उनसे संपर्क करता और फिर फर्जी डॉक्टर के पास भेजकर ठगी की वारदात को अंजाम देते थे। वारदात के बाद वे सिम कार्ड नष्ट कर शहर छोड़ देते थे।