प्रदेश में कानून व्यवस्था को लेकर पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि जैसलमैर में डकैती हो गई, जयपुर में कई घटनाएं हुई हैं, प्रदेश में आए दिन कुछ ना कुछ हो रहा है। ऐसे में मुख्यमंत्री को वक्त मिल नहीं रहा तो फिर गृह मंत्रालय किसी और को दें। ऐसे हालात कब तक चलते रहेंगे। पूर्व सीएम ने दौसा जिले के मानपुर कस्बे में मीडिया बात करते हुए यह बात कही। वे रविवार देर शाम को सिलिकोसिस पीड़ितों से मिलने यहां पहुंचे थे। वहीं बांदीकुई में सभा के दौरान सीएम भजनलाल शर्मा द्वारा गहलोत को ट्विटर मास्टर बताने के सवाल पर कहा- हम लोग टविटर मास्टर हुए तो अच्छी बात है ना, इसमें बुरा क्या है। यदि सोशल मीडिया के जरिए पूरी दुनिया में किसी बात का कोई मैसेज जाता है तो इसमें हर्ज क्या है। सोशल मीडिया की क्रांति है। इनकी पार्टी के नेताओं ने तो सोशल मीडिया पर पूरा हथकंडा खडा करके चुनाव जीत लिया। इसलिए वो किस मुंह से ऐसी बातें बोलते हैं, मेरी तो समझ से बाहर है। पीड़ितों से मिले गहलोत
पूर्व सीएम ने मानपुर कस्बे की गोलावाली ढाणी में सिलिकोसिस बीमारी के पीडितों से मुलाकात कर उनके हालचाल जाने। इस दौरान मरीजों के परिजनों ने बीमारी के बारे में बताया और कार्ड बनने में करप्शन की शिकायत करते हुए सुनवाई नहीं होने की बात कही। मौके पर मौजूद 3 मरीजों के सिलेंडर से आक्सीजन लेते देख गहलोत भावुक हो गए। उन्होंने पूर्व मंत्री ममता भूपेश को पीडितों की मदद के निर्देश दिए। कमेटी बनाकर एक्शन ले सरकार
गहलोत ने कहा कि इस तरफ सरकार का ध्यान जाना चाहिए। दो महिने पहले दौसा अस्पताल में देखा कि सिलिकोसिस मरीज आक्सीजन सिलेंडर लगाकर सांस ले रहे थे। यह बीमारी ऐसी खतरनाक है कि एक बार होने के बाद जान का खतरा बढ़ता जाता है। पहले सिलिकोसिस का इलाज टीबी समझकर किया जाता था, क्योंकि दोनों के लक्षण एक जैसे होते हैं। बाद में हमने प्रयास करके इसे समझा और मरीजों के लिए 5 लाख के पैकेज की व्यवस्था की। इसकी रोकथाम के लिए राज्य सरकार माइंस संचालकों को पाबंद करें, मजदूर सुरक्षा उपकरणों का प्रयोग करें और लापरवाही करने वाले मजदूरों को भी काम से हटाएं। 50 से ज्यादा विधवा, हम देख नहीं पा रहे
उन्होंने कहा कि यहां एक ढाणी की 50 से ज्यादा विधवा महिलाएं मौजूद हैं, हम देख नहीं पा रहे। क्या हो रहा है पूरे जोधपुर, करौली और दौसा इलाके में। सरकार को इसे गंभीरता से लेना चाहिए। सांसद मुरारीलाल मीणा ने लोकसभा में मुद्दा उठाया तो केन्द्र सरकार को बीमारी के बारे में पता चला और टीम भेजी गई। हम भी पता करेंगे कि यदि दो डॉक्टर्स ने गलती की है, सस्पेंड हो गए और जेल चले गए। जिसके बाद अन्य डॉक्टर्स ने हाथ खडे कर दिए। सर्टिफिकेट बनाने के पैसे मांगे जा रहे हैं। इसके लिए हम उच्च स्तर पर बात करेंगे। कागजों में हो रहा पॉलिसी का इम्पलीमेंट
वहीं सिलिकोसिस पॉलिसी के इम्पलिमेंट के सवाल पर गहलोत ने कहा कि सब कागजों में हो रहा है। यहां लोगों ने बताया कि सर्टिफिकेट नहीं बन रहे, ऐसे कई केस अभी सामने आए हैं। सरकार को कमेटी बनाकर मॉनिटरिंग करनी चाहिए। हमारी सरकार के वक्त पीडितों को करीब एक हजार करोड़ रुपए की सहायता वितरित की गई थी। लेकिन पेंडिंग केस बहुत पडे हुए हैं, ऐसी नौबत क्यों आ रही है, यह तो बहुत खतरनाक मामला है। मुख्यमंत्री को स्वयं एक मामला देखना होगा। इस दौरान नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली, आरटीडीसी के पूर्व चेयरमैन धर्मेन्द्र राठौड, विधायक रफीक खान, पवन गोदारा, जिला प्रमुख हीरालाल सैनी, ब्लॉक अध्यक्ष लटूरमल सैनी, खेमराज मीणा, पूर्व सरपंच रंगलाल सैनी, ज्योतिबा फूले सेवा समिति की अध्यक्ष अंजू सैनी समेत कई लोग मौजूद रहे।
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