Mathura Steamer Accident | Bhiwani Asha Middha Death Update


आशा मिड्‌ढा की उनके पति अर्जुन दास के साथ फाइल फोटो।

मथुरा के वृंदावन में शुक्रवार को यमुना नदी में नाव पलटने से 10 श्रद्धालुओं की मौत हो गई। इनमें भिवानी की रहने वाली आशा मिड्ढा (55) भी शामिल हैं।

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वह लुधियाना में रह रहे अपने मायके वालों के साथ वृंदावन गई थीं। इस हादसे में आशा के 6 मायके वालों की भी मौत हुई है।

आशा अपने परिवार के साथ भिवानी की जगत कॉलोनी में रहती थीं। वह तीन बच्चों की मां थीं। वह कल, गुरुवार को सोनीपत गई थीं। वहीं से वह बस में अन्य श्रद्धालुओं के साथ सवार हुईं।

आशा की मौत की सूचना मिलने के बाद उनके दोनों बेटे वृंदावन गए हुए हैं। आशा का शव कल भिवानी लाया जा सकता है।

भिवानी की जगत कॉलोनी में आशा मिड्‌ढा के घर के बाहर बैठे लोग।

भिवानी की जगत कॉलोनी में आशा मिड्‌ढा के घर के बाहर बैठे लोग।

जानिए नंदोई ने आशा के बारे में क्या बताया….

दोनों बेटे ढाबा संभालते हैं

आशा के नंदोई राधेश्याम ने बताया कि आशा की उम्र लगभग 55 साल थी। उनके पति अर्जुन दास मिड्ढा हैं। वह बीमार रहते हैं। इनके तीन बच्चे हैं- दो बेटे, अजय और दिनेश, और एक बेटी। तीनों शादीशुदा हैं। एक बेटे के दो बच्चे हैं, जबकि दूसरे के एक बच्चा है। दोनों बेटे रेलवे स्टेशन के बाहर जगदंबा ढाबा चलाते हैं। बेटी सोनीपत में शादीशुदा है और उसकी भी एक बेटी है।

9 अप्रैल को सोनीपत गई आशा

राधेश्याम ने आगे बताया कि आशा पिछले साल भी वृंदावन दर्शन करने के लिए गई थी। इस साल उसका लुधियाना से अपने मायके वालों के साथ प्लान बना हुआ था। 9 अप्रैल को उसका एक बेटा उसे सोनीपत छोड़ आया। वहां वह अपनी बेटी के घर रुकी।

बेटी-दामाद बस में बैठाकर आए

राधेश्याम के मुताबिक, रात को मुरथल में लुधियाना से बस आनी थी। आशा की बेटी और दामाद उसे छोड़ने मुरथल गए। जिसके बाद सभी वृंदावन चले गए। वे शुक्रवार सुबह 7 बजे वहां पहुंचे। दोपहर 3 बजे उन्हें हादसे की सूचना मिली, जिसके बाद दोनों बेटे वृंदावन के लिए रवाना हो गए।

आशा के बारे में जानकारी देते उसके नंदोई राधेश्याम।

आशा के बारे में जानकारी देते उसके नंदोई राधेश्याम।

एक ही परिवार के 7 सदस्यों की मौत

आशा मिड्‌ढा का मायका लुधियाना में है। इनके 7 सदस्यों की मौत हुई है। मृतकों में मधुर बहल, उसकी मां कविता बहल, चाचा चरणजीत, चरणजीत की पत्नी पिंकी बहल, मधुर की बुआ आशा रानी, दूसरी बुआ अंजू गुलाटी और फूफा राकेश गुलाटी शामिल हैं।

नाव पलटने के बाद रेस्क्यू ऑपरेशन चलाते गोताखोर और घटना की जानकारी देती महिला।

नाव पलटने के बाद रेस्क्यू ऑपरेशन चलाते गोताखोर और घटना की जानकारी देती महिला।

पुल से टकराकर पलटी नाव

जानकारी के मुताबिक, गुरुवार (9 अप्रैल) को लुधियाना में जगराओं के श्री बांके बिहारी क्लब ने 2 बसों में 130 श्रद्धालुओं को वृंदावन के लिए रवाना किया था। इनमें से 90 श्रद्धालु जगराओं से थे, जबकि बाकी अन्य शहरों से थे। यह यात्रा 4 दिन की थी। शुक्रवार को श्री बांके बिहारी के दर्शन करने के बाद श्रद्धालु यमुना पार करके मंदिरों के दर्शन के लिए जा रहे थे।

यमुना में पीपों का पुल बनाया गया था, लेकिन जलस्तर बढ़ने के बाद इसे खोल दिया गया था। पुल से टकराकर नाव पलट गई। हादसे से पहले का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें दिख रहा है कि किसी भी श्रद्धालु ने लाइफ जैकेट नहीं पहनी थी। वीडियो में श्रद्धालु “राधे-राधे” जप कर रहे थे।

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