MP में गेहूं खरीदी में देरी पर कांग्रेस का प्रदर्शन:खरीदी केंद्रों पर व्यवस्था देखने जाएंगे कांग्रेसी; एकलव्य वेयरहाउस के मूंग घोटाले का उठा मुद्दा




मध्य प्रदेश में गेहूं खरीदी में देरी और किसानों की समस्याओं को लेकर गुरुवार को कांग्रेस ने प्रदेश व्यापी आंदोलन किया। नर्मदापुरम के पीपल चौक पर जिला कांग्रेस कमेटी ने 4 घंटे तक धरना दिया। इसके बाद जिलाध्यक्ष शिवकांत पांडे के नेतृत्व में कार्यकर्ता रैली निकालकर कलेक्ट्रेट पहुंचे। धरने में पूर्व विधायक गिरिजा शंकर शर्मा, पुष्पराज पटेल, किसान कांग्रेस अध्यक्ष विजय पटेल सहित पिपरिया, इटारसी, सिवनी मालवा और केसला के सैकड़ों कार्यकर्ता शामिल हुए। बैरिकेड्स पर चढ़े कांग्रेसी, पुलिस से हुई नोकझोंक
कलेक्ट्रेट गेट पर पुलिस ने कांग्रेसियों को रोकने के लिए भारी घेराबंदी और बैरिकेडिंग कर रखी थी। प्रदर्शन के दौरान स्थिति तब तनावपूर्ण हो गई जब कुछ कार्यकर्ता बैरिकेड्स पर चढ़कर अंदर घुसने की कोशिश करने लगे। पुलिस बल ने उन्हें बलपूर्वक पीछे धकेला। इसके बाद सिटी मजिस्ट्रेट देवेंद्र प्रताप सिंह और एसडीओपी जितेंद्र पाठक को ज्ञापन सौंपा गया। ‘कांग्रेस के डर से शुरू की खरीदी’
पूर्व जिलाध्यक्ष पुष्पराज पटेल ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, “मोहन सरकार किसानों के साथ केवल धोखा कर रही है। जब सरकार को पता चला कि 9 अप्रैल को कांग्रेस बड़ा प्रदर्शन करने वाली है, तो आनन-फानन में कुछ केंद्रों पर खरीदी शुरू करा दी गई।” उन्होंने घोषणा की कि जिले के 145 केंद्रों पर कांग्रेसी खुद जाकर बारदाने, रस्सी और हम्मालों की व्यवस्थाओं की निगरानी करेंगे। 4.50 करोड़ का मूंग घोटाला: ‘खरीदने वाले को भी बनाओ आरोपी’
धरने के दौरान जिलाध्यक्ष शिवकांत पांडे ने माखननगर के एकलव्य वेयरहाउस से चोरी हुई 4.50 करोड़ की सरकारी मूंग का मुद्दा उठाया। उन्होंने मांग की कि इस घोटाले में केवल वेयरहाउस संचालक ही नहीं, बल्कि इटारसी की उस ‘बालाजी इंडस्ट्रीज’ को भी आरोपी बनाया जाए, जिसने चोरी की मूंग खरीदी है। ज्ञापन में रखी गईं प्रमुख मांगें: ब्याज माफी: किसानों का पिछला ब्याज माफ कर उन्हें ऋण मुक्त किया जाए। समय पर भुगतान: गेहूं खरीदी का भुगतान तुरंत सुनिश्चित हो और सोसायटियों के कर्ज चुकाने की तारीख बढ़ाई जाए। लिमिट खत्म हो: गेहूं खरीदी पर लगी प्रति क्विंटल की लिमिट को समाप्त किया जाए। मूंग की घोषणा: आगामी मूंग फसल की एमएसपी पर खरीदी की घोषणा फसल आने से पहले की जाए। व्यवस्थाएं: केंद्रों पर पर्याप्त बारदानों और हम्मालों का प्रबंध हो।



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