स्कूलों में नया शिक्षा सत्र शुरू होते ही अभिभावकों का बजट गड़बड़ा गया है। भारी-भरकम फीस के साथ किताबों का खर्च भी उन पर बोझ बन रहा है। इसके अलावा यूनिफॉर्म और स्टेशनरी का खर्च अलग से उठाना पड़ रहा है।
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दरअसल, अधिकांश निजी स्कूलों में एनसीईआरटी की बजाय निजी पब्लिकेशन की किताबें चल रही हैं। ये किताबें भी निर्धारित दुकानों पर ही उपलब्ध कराई जाती हैं। दैनिक भास्कर की पड़ताल में सामने आया कि पहली कक्षा में एनसीईआरटी की किताबों का पूरा सेट मात्र 195 रुपए का है, जबकि निजी स्कूलों में यही सेट 3280 से 4500 रुपए तक में मिल रहा है।
आरबीएसई से मान्यता प्राप्त स्कूलों में स्थिति कुछ बेहतर है। यहां पाठ्य पुस्तक मंडल की किताबें लागू हैं, जिनका पूरा सेट 165 से 987 रुपए के बीच उपलब्ध है। अन्य कक्षाओं में भी यही स्थिति है। दूसरी से 10वीं कक्षा तक एनसीईआरटी का पूरा सेट 195 से 700 रुपए तक का है, जबकि निजी स्कूलों में एक-एक किताब के ही 450 से 700 रुपए तक वसूले जा रहे हैं।
निजी स्कूल अभिभावकों से दो तरह से वसूली कर रहे हैं—पहला, निजी पब्लिकेशन की किताबें लगाकर और दूसरा, इन्हें केवल तय दुकानों से खरीदने के लिए बाध्य करके। हालांकि, अभिभावकों की शिकायतों पर शिक्षा विभाग समय-समय पर आदेश जारी करता है, लेकिन ये गाइडलाइन केवल औपचारिकता बनकर रह गई हैं। इनमें निजी स्कूलों की मनमानी रोकने के ठोस प्रावधान नहीं हैं।
भास्कर इनसाइट: गाइडलाइन में निजी पब्लिकेशन पर रोक नहीं
इन उदाहरणों से समझें अभिभावकों की परेशानी
सुनीता, अंत्योदय नगर निवासी बेटा सातवीं कक्षा में है। किताबों और कॉपियों पर 6924 रुपए खर्च हुए हैं, जिसमें 5800 रुपए किताबों के और 1124 रुपए कॉपियों व अन्य स्टडी मटेरियल पर लगे हैं।
देव्यानी, सुदर्शना नगर निवासी दो बेटियां हैं। छोटी सातवीं और बड़ी नौवीं कक्षा में है। सातवीं का बुक सेट 3200 रुपए और नौवीं का 4300 रुपए बताया गया है। अभी तक किताबें खरीदी नहीं गई हैं।
हर साल बदलता कोर्स, बढ़ता खर्च
अधिकांश निजी स्कूल हर साल कोर्स में बदलाव कर देते हैं। पूरी किताब बदलने के बजाय कुछ चैप्टर बदल दिए जाते हैं, जिससे पुरानी किताबें उपयोग में नहीं आ पातीं। ऐसे में अभिभावकों को नई किताबें खरीदनी पड़ती हैं।
गाइडलाइन में क्या है प्रावधान
शिक्षा विभाग ने निजी स्कूलों की मनमानी रोकने के लिए गाइडलाइन जारी की है, लेकिन इसमें निजी पब्लिकेशन की किताबों पर रोक का कोई प्रावधान नहीं है।
यूनिफॉर्म में 5 साल तक बदलाव नहीं किया जा सकेगा।
अभिभावक यूनिफॉर्म, जूते, टाई, कॉपियां आदि खुले बाजार से खरीद सकते हैं।
स्कूल परिसर में किताबें व अन्य सामग्री बेचने पर प्रतिबंध है।
आवश्यक सामग्री कम से कम तीन स्थानीय दुकानों पर उपलब्ध होनी चाहिए।
15 अप्रैल तक मांगी रिपोर्ट
नया सत्र शुरू होते ही शिक्षा निदेशालय ने सभी निजी स्कूलों के निरीक्षण के लिए तीन सदस्यीय समितियां गठित कर 15 अप्रैल तक रिपोर्ट मांगी है। हालांकि, ऐसे आदेश पहले भी जारी होते रहे हैं, लेकिन किसी स्कूल पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। जिले में कई स्कूल अब भी परिसर में ही किताबें और यूनिफॉर्म बेचकर नियमों की अनदेखी कर रहे हैं। डीईओ (माध्यमिक) किशनदान चारण ने बताया कि निजी स्कूलों में मनमानी रोकने के लिए समय-समय पर दिशा-निर्देश जारी किए जाते हैं। निरीक्षण के बाद नियमों का उल्लंघन करने वाले स्कूलों की रिपोर्ट शिक्षा निदेशालय को भेजी जाएगी।
“निजी स्कूलों में पुस्तकों, यूनिफॉर्म, जूते व टाई आदि की मनमानी पर रोक के संबंध में समय-समय पर दिशा निर्देश जारी किए जाते रहे हैं। शिक्षा निदेशालय ने मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी की अध्यक्षता में तीन सदस्य कमेटी गठित कर 15 अप्रैल तक सभी स्कूलों का निरीक्षण करवाकर रिपोर्ट मांगी है। जिन स्कूलों की ओर से नियमों की अवहेलना की जा रही है उनकी रिपोर्ट शिक्षा निदेशालय को भेजी जाएगी।” -किशनदान चारण, डीईओ, माध्यमिक