जब आप मंच पर हों तो आप उस किरदार के रूप में होते हों जिसे आप निभा रहे हों। राजा का हो या रंक का, समझदार हो या नासमझ का, अफसर का हो या नौकर का, आपका किरदार ही मंच पर आपकी पहचान है। एक एक्टर को तालियां इस बात के लिए नहीं मिलती कि आप कौनसा किरदार निभा रहे हैं बल्कि इस बात के लिए मिलती है कि आप जिस किरदार के लिए मंच पर हो, उसे आपने कितनी सरलता से, कितने नेचुरल तरीके से और कितना डूबकर निभाया है। यह कहना था थिएटर स्कॉलर, रंगकर्मी और डायरेक्टर अजयकरण जोशी का। वे स्टूडियो बज्म में चल रही एक्टिंग वर्कशॉप में युवा कलाकारों को एक्टिंग की बारीकियां सिखाते हुए किरदार निभाने की प्रक्रिया बता रहे थे। इसमें 15 प्रतिभागियों ने भाग लेकर अभिनय की बारीकियों को सीखा। वर्कशॉप संयोजक आयुषी व्यास व वैभवी जोशी ने बताया कि यह वर्कशॉप में प्रतिभागियों को अभिनय की मूलभूत तकनीकों, संवाद अदायगी, बॉडी लैंग्वेज, और मंच संचालन जैसे पहलुओं पर प्रशिक्षण दिया। रंगकर्मी अजयकरण जोशी और युवा लेखक निर्देशक मनोज पंवार अब प्रोडक्शन बेस्ड वर्कशॉप की प्लानिंग कर रहे हैं जिसमें प्रतिभागियों को शॉर्ट फिल्म मेकिंग और नाटकों के मंचन का प्रेक्टिकल एक्सपीरियंस मिल सके। रंगकर्मी व थिएटर स्कॉलर जोशी ने दिए एक्टिंग के टिप्स वर्कशॉप
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