एटा में शिक्षकों का टेट अनिवार्यता के विरोध में मशाल:सुप्रीम कोर्ट के आदेश के खिलाफ PM और शिक्षा मंत्री को ज्ञापन




एटा में प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों के शिक्षकों ने शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता के विरोध में मशाल जुलूस निकाला। सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश के खिलाफ यह प्रदर्शन किया गया, जिसमें शिक्षकों के लिए टीईटी उत्तीर्ण करना अनिवार्य किया गया है। अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ एटा के बैनर तले शिक्षकों ने शहीद पार्क से कलेक्ट्रेट परिसर तक पैदल मार्च किया। इस दौरान शिक्षकों ने हाथों में मशालें और ‘टीईटी अनिवार्यता समाप्त करो’, ‘काला कानून वापस लो’ लिखी पट्टिकाएं ले रखी थीं। हजारों की संख्या में मौजूद शिक्षकों की आवाज साउंड सिस्टम के माध्यम से शहर की सड़कों पर गूंजती रही। कलेक्ट्रेट पहुंचकर शिक्षकों ने जिलाधिकारी एटा के माध्यम से प्रधानमंत्री और केंद्रीय शिक्षा मंत्री को संबोधित एक ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में मांग की गई है कि शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम लागू होने से पहले नियुक्त किए गए शिक्षकों पर टीईटी की अनिवार्यता लागू करना न्यायसंगत नहीं है। शिक्षकों का तर्क है कि इन शिक्षकों की नियुक्ति उस समय की प्रचलित नियमावली के अनुसार हुई थी, जब टीईटी अनिवार्यता लागू नहीं थी। लगभग 25-30 वर्ष की सेवा और अनुभव वाले शिक्षकों को टीईटी से मुक्त रखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि पूर्व में नियुक्त शिक्षकों पर बाद में लागू की गई शर्तों को बाध्यकारी बनाना उचित नहीं है। शिक्षकों ने सरकार से इस समस्या पर पुनः विचार करने और उन्हें टीईटी की अनिवार्यता से मुक्त करने का आग्रह किया। कलेक्ट्रेट परिसर में हुई सभा में शिक्षकों ने टीईटी अनिवार्यता कानून के विरोध में अपने विचार व्यक्त किए। इस मशाल जुलूस रैली में एक दर्जन से अधिक शिक्षक संगठनों के पदाधिकारी, कार्यकर्ता और शिक्षक-शिक्षिकाएं उपस्थित रहे। इनमें प्रवीण कुमार फ़ौजी (संयोजक), राधेश्याम यादव (मीडिया प्रभारी), ओमेंद्र प्रताप सिंह (कोषाध्यक्ष), उमेश दिनकर, वीरपाल सिंह, प्रवेश बघेल, सौरव मिश्रा शिल्पी, बलराम गुप्ता, अनुराग उपाध्याय, राहुल कुमार, भानु प्रताप बौद्ध, धर्मेंद्र यादव और राजूराम रत्न प्रमुख थे। श्री कांत यादव, राजेश यादव, आलोक मिश्रा और राजीव पचौरी भी मौजूद थे।



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