केन-बेतवा लिंक परियोजना के तहत ढोड़न बांध निर्माण के विरोध में आदिवासी किसानों का चिता आंदोलन शनिवार को और उग्र हो गया। छतरपुर में सात दिनों से धरने पर बैठे ग्रामीणों और प्रशासन के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है। आंदोलनकारियों का आरोप है कि कलेक्टर पार्थ जैसवाल ने मेडिकल टीम भेजने का दावा किया था, लेकिन उपचार के लिए डॉक्टर उन तक नहीं पहुंचे। उनका कहना है कि आंदोलन स्थल से 7 किलोमीटर पहले ही पुलिस ने बैरिकेडिंग कर डॉक्टरों, अन्य लोगों और पत्रकारों को वापस लौटा दिया। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि भूख या बीमारी से किसी की जान जाती है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। आरोप- दवाइयां तक पहुंचने से रोक दी
प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों के परिजनों ने आरोप लगाया है कि प्रशासन ने राशन और जरूरी दवाइयां आंदोलन स्थल तक पहुंचने से रोक दी हैं। इससे वहां मौजूद महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों की हालत बिगड़ रही है। कई प्रदर्शनकारियों की तबीयत खराब हो रही है। ग्रामीणों का कहना है कि यह आंदोलन मुआवजा और विस्थापन के अधिकार के लिए है, लेकिन प्रशासन उनकी आवाज दबाने का प्रयास कर रहा है। इस बीच, एक वीडियो सामने आया है जिसमें बिजावर की डॉ. कंचन शुक्ला यह कहते हुए दिख रही हैं कि वह आंदोलनकारियों का उपचार करने जाना चाहती हैं, लेकिन प्रशासन उन्हें रोक रहा है। क्षेत्र में भारी पुलिस बल तैनात
इधर, पन्ना टाइगर रिजर्व के पास भूसोर गेट पर भी नया विवाद खड़ा हो गया है। प्रशासन के नए नियमों के कारण आवाजाही पर रोक लगाने से आंदोलन के और भड़कने की आशंका है। यह भी बताया जा रहा है कि क्षेत्र में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। ग्रामीणों में आशंका है कि प्रशासन कभी भी बल प्रयोग कर सकता है। महिलाएं और बुजुर्ग भी आंदोलन में डटे हुए हैं, जिससे स्थिति और अधिक संवेदनशील हो गई है। कलेक्टर बोले- कानूनी व्यवस्था नहीं बिगड़ने देंगे
जबकि कलेक्टर पार्थ जैसवाल का कहना है कि राशन, पानी, एंबुलेंस, दवाओं के अलावा अति आवश्कय सेवाओं पर किसी भी प्रकार की रोक नहीं लगाई है। हमनें उनके उपचार के लिए एक टीम भी इसीलिए भेजी है। 163 लागू होने से बाहरी लोगों के जाने पर रोक है। वहां की कानून व्यवस्था नहीं बिगड़ने देंगे।
Source link