बेगूसराय के चांदपूरा स्थित अतिरिक्त स्वास्थ्य केंद्र में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली को लेकर शनिवार को ग्रामीणों ने विरोध किया। ग्रामीणों ने अस्पताल प्रबंधन पर इमरजेंसी और सामान्य बीमारियों के इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया। ग्रामीणों का कहना है कि अस्पताल में ब्लड, यूरिन और ईसीजी जैसी जांच सुविधाएं होने का दावा किया जाता है, लेकिन स्टाफ की लापरवाही के कारण मरीजों को इनका लाभ नहीं मिल पाता। कई मरीजों को बिना जांच कराए ही लौटना पड़ता है। स्थानीय निवासी राजाराम महतो और सुरो महतो ने बताया कि उन्हें शुगर और बीपी जांच के लिए कई बार निराश लौटना पड़ा। दवाओं की उपलब्धता के बारे में पूछने पर अक्सर “दवा उपलब्ध नहीं है” कहकर टाल दिया जाता है, जिससे मरीजों को बाहर से दवाएं खरीदनी पड़ती हैं। सुनील महतो ने बताया कि उन्हें बुखार, खांसी और सर्दी की दवा लेने से दोपहर 2 बजे के बाद मना कर दिया गया। ड्यूटी रोस्टर के अनुसार शनिवार को डॉ. सुरभी कुमारी और डॉ. अनुपम कुमारी की ड्यूटी थी, लेकिन वे अनुपस्थित पाई गईं। परना गांव की नीलम देवी ने आरोप लगाया कि अस्पताल में प्रसव की उचित व्यवस्था नहीं है और रात में डॉक्टरों की अनुपलब्धता के कारण मरीजों को निजी या सदर अस्पताल जाना पड़ता है। अस्पताल में कई कर्मचारी बिना पहचान पत्र और निर्धारित ड्रेस के काम करते दिखे, जिससे उनकी पहचान पर सवाल उठे। ड्यूटी समय के पालन में भी अनियमितता पाई गई। ग्रामीणों ने बताया कि एंबुलेंस होने के बावजूद चालक ड्यूटी के दौरान सोता मिला और वार्ड में बेड पर चादर तक नहीं थी। इस संबंध में बेगूसराय सदर पीएचसी प्रभारी डॉ. दिवाकर कुमार ने डॉक्टरों की अनुपस्थिति पर स्पष्टीकरण देते हुए बताया कि डॉ. सुरभी कुमारी और डॉ. अनुपम कुमारी प्रतिरक्षण कार्य में लगी हुई थीं। इस संबंध में बेगूसराय के सिविल सर्जन डॉ. अशोक ने कहा कि पूरे मामले की जांच कराई जाएगी और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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