पंचायत-निकाय चुनाव टलवाने के लिए सरकार पहुंची हाईकोर्ट:कहा-दिसंबर तक चुनाव कराना संभव नहीं, हर माह की परिस्थिति बताई, कोर्ट के 15 अप्रेल तक थे निर्देश




राज्य सरकार प्रदेश में पंचायत और निकाय चुनाव स्थगित कराने के लिए हाईकोर्ट पहुंच गई हैं। सरकार की ओर से हाईकोर्ट में प्रार्थना पत्र दायर करके 15 अप्रेल तक चुनाव कराने में असमर्थता जताई गई हैं। महाधिवक्ता राजेन्द्र प्रसाद द्वारा दायर प्रार्थना पत्र में सरकार ने हर महीने की परिस्थिति बताते हुए अप्रत्यक्ष रूप से कह दिया है कि दिसंबर तक चुनाव करा पाना संभव नहीं हैं। प्रार्थना पत्र में सरकार ने कहा-उसने अदालत के आदेश की पालना के लिए हर संभव प्रयास किया। लेकिन वर्तमान परिस्थितियां ऐसी है कि 15 अप्रेल तक चुनाव कराया जाना संभव नहीं हैं। सरकार ने ओबीसी आयोग की रिपोर्ट, स्कूल, स्टॉफ, ईवीएम सहित अन्य संसाधनों की उपलब्धता का हवाला देकर हाईकोर्ट से चुनाव आगे खिसकाने का अनुरोध किया हैं। सरकार ने पूर्व विधायक संयम लोढ़ा और गिर्राज देवंदा की जनहित याचिकाओं में प्रार्थना पत्र दायर किया हैं। जिस पर आने वाले समय में हाईकोर्ट सुनवाई करेगा। ओबीसी आयोग की रिपोर्ट का हवाला
सरकार ने कहा कि उसने 9 मई 2025 को ही ओबीसी आयोग का गठन कर दिया था। लेकिन आयोग ने रिपोर्ट तैयार करने के लिए बार बार समय की मांग की। जिससे उसका कार्यकाल समय-समय पर बढ़ाया गया। नए सिरे से ओबीसी आरक्षण को लागू किए बिना चुनाव कराना सामाजिक न्याय के विपरीत हैं। इस रिपोर्ट के मिलने के बाद ही सरकार अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी), अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) और महिलाओं के लिए सीटों की पहचान और आरक्षण की प्रक्रिया पूरी कर पाएगी, ताकि उनके लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा की जा सके। हर महीने की अलग-अलग परिस्थितियां बताई
अप्रेल- स्कूलों में नया सैशन शुरू हुआ है, 25 अप्रेल तक एडमिश्न चलेंगे। टीचर्स की व्यस्तत्ता
मई-जून- प्रदेश में भीषण गर्मी पड़ती है। आपदा प्रबंधन पर जोर रहेगा।
जुलाई-सितंबर- बारिश का सीजन, ग्रामीण इलाकों में अधिकांश वोटर कृषि कार्यों व्यवस्त रहते हैं।
अक्टूबर-दिसंबर- कई पंचायत समितियों और जिला परिषदों का कार्यकाल खत्म हो रहा है। उनके कार्यकाल की समाप्ति के पास चुनाव कराना बेहतर होगा। वन स्टेट वन इलेक्शन की धारना को बल मिलेगा। लाखों कर्मचारी और हजारों पोलिंग बूथ
प्रार्थना पत्र में सरकार की ओर से कहा गया कि शहरी निकायों के सामान्य चुनाव कराने के लिए 22,891 मतदान केंद्र बनाए जाने की संभावना है। इसकी तरह से ग्रामीण इलाकों में 45,380 मतदान केंद्र अपेक्षित हैं। शहरी मतदान केंद्रों के लिए लगभग 1,14,455 कर्मियों की आवश्यकता होगी। वहीं ग्रामीण मतदान केन्द्रों पर 2,26,900 कर्मियों की आवश्यकता होगी। ईवीएम मशीन और उनको रिसेट करना भी बड़ा टास्क रहेगा। ऐसे में इन संसाधनों की समुचित व्यवस्था के लिए उचित समय दिया जाए।



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