पठानकोट में सड़कों पर उतरे टीचर:पंजाब सरकार का पुतला फूंक की नारेबाजी, टेट की शर्त पर जताई नाराजगी




पठानकोट में अध्यापकों के संयुक्त संगठन साझा अध्यापक मोर्चा ने सड़कों पर उतरकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। मोर्चा में शामिल मास्टर कैडर यूनियन, सरकारी अध्यापक यूनियन, पुरानी पेंशन बहाली यूनियन और अन्य संगठनों ने पंजाब सरकार के खिलाफ कड़ा विरोध जताया और पंजाब सरकार तथा शिक्षा मंत्री का पुतला जलाया।
अध्यापकों ने टेट की शर्त को लेकर नाराजगी जाहिर की और चेतावनी दी कि अगर सरकार ने उनकी मांगों को अनदेखा किया तो वे इस संघर्ष को तीखा करने के लिए विवश होंगे। टेट की शर्त को लेकर अध्यापकों में भारी रोष
मास्टर कैडर यूनियन के जिला अध्यक्ष रमन कुमार, सरकारी अध्यापक यूनियन के अध्यक्ष सुभाष कुमार, पुरानी पेंशन बहाली यूनियन के रजनीश कुमार और भवानी ठाकुर आदि नेताओं ने कहा कि पंजाब सरकार द्वारा अध्यापकों पर थोपी गई अनावश्यक टेट की शर्त को लेकर अध्यापकों में भारी रोष है।
इस संबंध में पहले बड़े पैमाने पर रैलियां की गई थीं, लेकिन अध्यापकों की बात सुनने के बजाय, सरकार ने पानी की बौछारों (वॉटर कैनन) और लाठीचार्ज का सहारा लिया, जो लोकतंत्र पर सीधा हमला है। टीचरों के पक्ष में विधानसभा में प्रस्ताव पारित करे सरकार
यूनियनों ने मांग करते कहा कि सरकार तुरंत अध्यापकों के पक्ष में एक पुनर्विचार याचिका दायर करे और विधानसभा में एक प्रस्ताव पारित करे। लेकिन, इस संबंध में अब तक कोई कदम नहीं उठाया गया है। इसके अलावा, अध्यापकों पर अनावश्यक रूप से बीएलओ ड्यूटी का बोझ डाला जा रहा है। विशेष रूप से एसआईआर के काम से अध्यापकों की मुख्य जिम्मेदारी बच्चों को पढ़ाना प्रभावित हो रही है।
टीचरों से गैर-शैक्षणिक कार्य लेना तुरंत बंद करे सरकार
यूनियनों ने स्पष्ट किया कि टीचरों से गैर-शैक्षणिक कार्य लेना तुरंत बंद किया जाना चाहिए। ताकि,विद्यार्थियों की शिक्षा प्रभावित न हो। इसके साथ ही पुरानी पेंशन योजना के मामले में सरकार द्वारा किया गया वादा अभी तक पूरा नहीं किया गया है।
सरकार ने सत्ता में आने पर ओपीएस (पुरानी पेंशन योजना) लागू करने का वादा किया था और एक अधिसूचना भी जारी की गई थी। लेकिन, अभी तक लागू नहीं किया गया है। जिसके कारण कर्मचारियों में गहरी निराशा है। मांगें न मानी तो संघर्ष को और तेज करेंगे टीचर
यूनियनों ने चेतावनी देते कहा कि सरकार कर्मचारियों की लंबित वित्तीय मांगों की भी पूरी तरह से अनदेखी कर रही है। 16 प्रतिशत महंगाई भत्ता अभी तक लंबित है।
हाई कोर्ट में डीए के संबंध में सरकार द्वारा दिए गए हलफनामे में सरकार का कर्मचारी-विरोधी चेहरा बेनकाब हो गया है। इस तरह, सरकार ने कर्मचारियों और अपने बीच एक बड़ी दीवार खड़ी कर दी है।
यूनियन नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि पंजाब सरकार जल्द ही कर्मचारियों की जायज मांगों को स्वीकार नहीं करती है, तो आने वाले समय में संघर्ष को और तेज किया जाएगा, जिसके लिए सरकार पूरी तरह से जिम्मेदार होगी।



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