जोधपुर में 890 साल पुरानी परंपरा से करेंगे भविष्यवाणी:अकाल, सुकाल से लेकर राजनीतिक माहौल पर भी मिलेंगे संकेत, घांची समाज की पहल

[ad_1]


जोधपुर में घांची समाज की ओर से 19 अप्रैल को अक्षय तृतीया पर बाईजी का तालाब स्थित घांची समाज बगीची में धणी का आयोजन होगा। इसमें अकाल-सुकाल और राजनीतिक उठापटक को लेकर भी भविष्यवाणी की जाएगी। जोधपुर में ये परम्परा वर्षों पुरानी है। जिसमें अकाल और सुकाल को लेकर अनुमान लगाया जाएगा। कार्यक्रम को लेकर तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। इस तरह से मिलता संकेत दरअसल इस काम के लिए दो बच्चों को गीले वस्त्रों में यज्ञ शाला में खड़ा किया जाता है। उनके हाथों में बांस की दो खपचियां जिन पर कुमकुम लगा होता है। दोनों खपचियों में एक पर कुमकुम तो एक पर काजल लगाई जाती है। कुमकुम लगी खपची को सुकाल (अच्छा जमाना) व काजल लगी खपची को काल (अकाल) के रूप में दर्शाया जाता है। उसके नीचे बनी मिट्टी की वेदी पर 7 तरह के अनाज, गुड़ व पताशों के साथ रखे जाते हैं। 890 साल पहले शुरू हुई परंम्परा घांची महासभा अध्यक्ष राजेंद्र कुमार सोलंकी ने बताया समाज की स्थापना 890 साल पहले हुई थी। तब से समाज की और से ये कार्यक्रम धूमधाम से मनाया जा रहा है। अध्यक्ष गंगाराम सोलंकी, कोषाध्यक्ष घनश्याम परिहार ने बताया कि आस्था के साथ भविष्यवाणी की सदियों पुरानी परंपरा को आगे बढ़ाया जाएगा। आने वाले समय में अकाल-सुकाल की भविष्यवाणी अनुष्ठान से की जाएगी। समिति के सचिव कमलेश भाटी ने बताया कि बैठक में घांची महासभा के अध्यक्ष राजेंद्र कुमार सोलंकी, श्यामलाल भाटी (गोपाल प्याऊ प्रबंधक), पूर्व महासचिव राजेश सोलंकी, बालीचंद भाटी, मूलचंद भाटी, प्रकाश बोराणा, मगराज भाटी, जितेंद्र सोलंकी, जगदीश पावर, छगनलाल बोराणा, रमेश भाटी, पुखराज सोलंकी, रमेश सोलंकी, नरेश भाटी व किशन रांकावत उपस्थित रहे।

[ad_2]

Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *