जोधपुर के रातानाडा स्थित टैंक चौक में 28 मार्च 2026 को लेफ्टिनेंट जनरल हणुत सिंह जसोल की प्रतिमा का अनावरण किया गया। उन्हें परमवीर चक्र और महावीर चक्र से सम्मानित किया गया था। रावल किशन सिंह जसोल ने किया अनावरण प्रतिमा का अनावरण रावल किशन सिंह जसोल द्वारा किया गया। इस समारोह में दो प्रतिमाओं का अनावरण हुआ, जिससे यह आयोजन ऐतिहासिक बन गया। कई हस्तियां रहीं मौजूद
यह आयोजन भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट जनरल हणुत सिंह जसोल के वीरता, त्याग और कर्तव्यनिष्ठा के योगदान को याद करने का अवसर था। समारोह में सैन्य और सामाजिक क्षेत्र की कई प्रतिष्ठित हस्तियां उपस्थित रहीं। इनमें 12 कोर कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल आदित्य विक्रम सिंह राठी (एवीएसएम), जोधपुर उप क्षेत्र के कमांडर मेजर जनरल अनुराग छिब्बर (एसएम, वीएसएम), कर्नल शंभू सिंह देवड़ा कालंद्री (एसएम), राजकुमार भूपेंद्र सिंह वाव, निपेन्द्र सिंह वाव, कुंवर हरिशचंद्र सिंह जसोल और कुंवर अजमल सिंह सहित अनेक गणमान्य जन शामिल थे। कार्यक्रम में सेवानिवृत्त पूना हॉर्स रेजिमेंट के अधिकारियों की गरिमामयी उपस्थिति रही। साथ ही शंभू रेजिमेंट, 10 पैरा (विशेष बल) से जुड़े सैन्य अधिकारियों की सहभागिता भी उल्लेखनीय रही। इस अवसर पर मेजर जनरल दलवीर सिंह (10 पैरा) तथा मेजर अजमल सिंह सहित अन्य सैन्य एवं विशिष्ट जन उपस्थित रहे। हणुत सिंह जी का जीवन राष्ट्रसेवा की सर्वोच्च प्रेरणा” — रावल किशन सिंह जी जसोल
इस अवसर पर रावल किशन सिंह जसोल ने अपने उद्बोधन में कहा कि लेफ्टिनेंट जनरल हणुत सिंह जी जसोल एक महान सैन्य अधिकारी, राष्ट्र के प्रति समर्पण, त्याग, तप और आध्यात्मिक ऊँचाइयों के प्रतीक हैं। उनका जीवन यह दर्शाता है कि सच्ची देशभक्ति शब्दों से आगे बढ़कर कर्तव्य के प्रति पूर्ण निष्ठा और समर्पण में प्रकट होती है। उन्होंने कहा कि वर्ष 1971 के युद्ध में हणुत सिंह जी द्वारा प्रदर्शित नेतृत्व, रणकौशल और साहस भारतीय सेना के इतिहास में स्वर्णिम अध्याय के रूप में सदैव अंकित रहेगा। उनका व्यक्तित्व अनुशासन, सादगी और आध्यात्मिक गहराई का अद्वितीय संगम था, जो आज भी हर राष्ट्रभक्त के लिए प्रेरणा का स्रोत है। वीरता और अनुशासन की जीवंत मिसाल
वक्ताओं ने अपने संबोधन में कहा कि लेफ्टिनेंट जनरल हणुत सिंह जी का संपूर्ण जीवन अदम्य साहस, उच्च कोटि के नेतृत्व, कठोर अनुशासन और अटूट कर्तव्यनिष्ठा का उत्कृष्ट उदाहरण है। उनका जीवन यह संदेश देता है कि राष्ट्र सेवा सर्वोच्च कर्तव्य है और इसके लिए समर्पण ही सच्ची पहचान है। उनका सादा जीवन, गहन आध्यात्मिकता और कर्तव्य के प्रति निष्ठा उन्हें एक असाधारण व्यक्तित्व बनाती है, जो आने वाली पीढ़ियों को निरंतर प्रेरित करता रहेगा। नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का केंद्र
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित जनसमूह ने वीर सपूत को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके आदर्शों को अपनाने का संकल्प लिया। पूरे आयोजन में देशभक्ति, सम्मान और गर्व का वातावरण व्याप्त रहा। रातानाडा स्थित टैंक चौक पर स्थापित यह प्रतिमा न केवल एक स्मारक है, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों के लिए राष्ट्रसेवा, साहस, अनुशासन और कर्तव्यपालन की प्रेरणा का सशक्त केंद्र बनेगी। यह आयोजन जोधपुर सहित पूरे देश के लिए गर्व और प्रेरणा का विषय बना। यह समारोह राष्ट्र के वीर सपूतों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करने का सशक्त माध्यम सिद्ध हुआ। इस ऐतिहासिक अवसर पर उपस्थित रहना सभी के लिए एक अविस्मरणीय और प्रेरणादायी अनुभव रहा।
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