पटना में महिलाओं की सुरक्षा और सुविधा के उद्देश्य से शुरू की गई महत्वाकांक्षी ‘पिंक बस’ सेवा अब सवालों के घेरे में है। इसमें कार्यरत महिला ड्राइवरों और कर्मियों ने अपनी बदहाली को लेकर एक मार्मिक पत्र लिखा है। पत्र के माध्यम से इन महिलाओं ने काम न मिलने, अधिकारियों के दुर्व्यवहार और बुनियादी सुविधाओं के अभाव का आरोप लगाया है। पत्र में महिला कर्मियों ने सुधा वर्गीज दीदी से इस मामले में हस्तक्षेप करने की गुहार लगाई है। उन्होंने निवेदन किया है कि उनकी समस्याओं पर ध्यान देकर उन्हें उचित मार्गदर्शन और सहायता प्रदान की जाए, ताकि वे सम्मान के साथ अपना काम कर सकें। ट्रेनिंग मिली, पर स्टेयरिंग नहीं पत्र में महिलाओं ने शिकायत किया है कि वे प्रशिक्षित हैं और पिंक बस सेवा में आधिकारिक रूप से कार्यरत हैं, लेकिन उन्हें बस चलाने का अवसर नहीं दिया जा रहा है। पिछले 3-4 महीनों से उन्हें बिना किसी काम के ऑफिस में बिठाया जा रहा है। “हमें बस चलाने का मौका नहीं मिल रहा है, हम पूरे दिन बिना कार्य के बैठे रहते हैं। पिछले कई महीनों से हमें केवल घुमाया जा रहा है।” ड्यूटी का न समय, न ठिकाना पत्र में काम के टाइमिंग को लेकर भी शिकायत की गई है। महिला कर्मियों ने बताया कि उन्हें सुबह 5 से 6 बजे के बीच ड्यूटी पर बुला लिया जाता है, जबकि उनकी घर वापसी रात के 9:30 से 10 बजे तक होती है। इतने लंबे समय तक कार्यस्थल पर रहने के बावजूद उन्हें ड्राइविंग का मौका नहीं दिया जाता, जो उनके मानसिक तनाव का बड़ा कारण बन रहा है। दफ्तर में बुनियादी सुविधाओं का अकाल महिला कर्मियों ने शिकायत किया है कि दफ्तर में महिलाओं के लिए पानी और वॉशरूम (शौचालय) जैसी मूलभूत सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हैं। एक तरफ सरकार स्वच्छ भारत और महिला गरिमा की बात करती है। दूसरी तरफ महिला ड्राइवरों को इन बुनियादी जरूरतों के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। दुर्व्यवहार और मानसिक उत्पीड़न के आरोप महिलाओं ने आरोप लगाया है कि जब वे अपनी समस्याओं को लेकर बात करती हैं तो कुछ अधिकारी उनकी मदद करने के बजाय उनका मजाक उड़ाते हैं। कार्यस्थल पर सम्मान जनक व्यवहार की कमी और अधिकारियों के इस रवैये से महिला कर्मियों का मनोबल बुरी तरह टूट चुका है।
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