फरीदकोट जिले में पिछले एक सप्ताह से जारी तेज हवाओं के साथ बेमौसमी बारिश ने किसानों की परेशानी बढ़ा दी है। खेतों में तैयार खड़ी गेहूं की फसल जमीन पर गिर गई। इससे फसल के उत्पादन को नुकसान पहुंचा है। कई गांवों में 50 प्रतिशत से अधिक फसल बर्बाद होने की बात सामने आई है, जिससे किसानों के चेहरे पर मायूसी छा गई है। प्रभावित किसानों का कहना है कि उन्होंने कर्ज लेकर फसल तैयार की थी, लेकिन अचानक बदले मौसम ने उनकी पूरी मेहनत पर पानी फेर दिया। ऐसे हालात में उन्होंने सरकार से प्रति एकड़ 50,000 रुपये मुआवजा देने की मांग की है, ताकि वे इस संकट से उबर सकें। फसल को बच्चों की तरह संभालते हैं
नेशनल हाईवे से सटे यहां के गांव टहिना में किसानों ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा कि वे छह महीने तक फसल को अपने बच्चों की तरह संभालते हैं, लेकिन प्राकृतिक आपदा एक झटके में सब कुछ खत्म कर देती है। इस मौके पर बलदेव सिंह, तेज सिंह, सुखदेव सिंह, यादविंदर सिंह आदि ने बताया कि बारिश के कारण न सिर्फ फसल गिर गई, बल्कि गेहूं के दाने भी काले पड़ गए हैं। इस कारण फसल की गुणवत्ता पर भी असर पड़ा है।
अब मुश्किल से 5 क्विंटल ही मिल पाएगा : पूर्व सरपंच
इस मौके पर गांव टहिना के पूर्व सरपंच गुरविंदर सिंह ने बताया कि उनके ही नहीं बल्कि पूरे जिले के हर गांव और हरेक किसान की फसल प्रभावित हुई है। पहले प्रति एकड़ 20 क्विंटल गेहूं के उत्पादन की उम्मीद थी, अब मुश्किल से 5 क्विंटल ही मिल पाएगा। मदद न मिली तो किसान झेलेंगे आर्थिक संकट
उन्होंने इसे किसानों के लिए बेहद निराशा जनक स्थिति करार देते हुए प्रशासन व सरकार से तुरंत खराब फसलों की गिरदावरी करवा कर किसानों को राहत देने की मांग की है। उन्होंने कहा कि अगर जल्द मदद नहीं मिली तो उन्हें भारी आर्थिक संकट का सामना करना पड़ सकता है। फिलहाल किसान आसमान की ओर टकटकी लगाए सरकार से राहत की उम्मीद कर रहे हैं।
Source link